
विधायक राजेंद्र भारती पर धोखाधड़ी के आरोपों की दोबारा जांच करें, सुप्रीम कोर्ट का MP सरकार को आदेश
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MP की दतिया सीट से कांग्रेस के विधायक भारती की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने गवाहों के हलफनामों का हवाला देते हुए दावा किया कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के विधायक राजेंद्र भारती के खिलाफ कथित धोखाधड़ी मामले की जांच को किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित करने की अर्जी पर सुनवाई की और राज्य अधिकारियों को आरोपों की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं और गवाहों पर दबाव व धमकी के आरोपों की जांच में राज्य द्वारा नियुक्त अधिकारियों ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया.
जस्टिस अभय एस. ओक और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा, "हमने हलफनामों का अवलोकन किया है. इनसे पता चलता है कि दबाव और धमकी की शिकायतों की जांच ठीक ढंग से नहीं हुई. निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य और दायित्व है, जो हर नागरिक का अधिकार भी है."
दतिया सीट से कांग्रेस के विधायक भारती की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने गवाहों के हलफनामों का हवाला देते हुए दावा किया कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी थी.
उन्होंने कहा, "राजनीतिक बदले की भावना से मेरे मुवक्किल के खिलाफ फर्जी मामला बनाया गया है. इसलिए जांच को मध्य प्रदेश से बाहर स्थानांतरित किया जाए."
दरअसल, विधायक राजेंद्र भारती ने जिला सहकारी कृषि बैंक घोटाले से जुड़े धोखाधड़ी के आरोपों को झूठा करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की थी. उन्होंने मांग की कि मामले की जांच राज्य से बाहर कराई जाए, क्योंकि यह आरोप राजनीतिक दबाव और प्रतिशोध के कारण लगाए गए हैं. बता दें कि वरिष्ठ नेता कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती साल 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के नरोत्तम मिश्रा को 8800 वोटों से हराकर विधायक बने थे. नरोत्तम लगातार 3 बार से दतिया के विधायक थे. उन्हें बीजेपी का कद्दावर नेता कहा जाता है.

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