
विदेशों में काम करने वाले घरेलू कामगारों के लिए क्या हैं नियम, एम्प्लॉयर सताए तो कितनी मदद देगी सरकार?
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ऑस्ट्रेलियाई अदालत ने पूर्व भारतीय राजदूत नवदीप सूरी सिंह पर अपनी घरेलू सहायिका से गुलामों जैसा बर्ताव करने को लेकर जुर्माना लगाया. पहले भी इस तरह की कई घटनाएं आ चुकीं. विदेश काम करने पहुंचे घरेलू सहायकों का कभी पासपोर्ट रख लिया जाता है तो कभी वेतन ही नहीं दिया जाता. क्या कहता है दूसरे देशों का कानून? बाहर से आए कामगारों के लिए कैसे हैं नियम?
डोमेस्टिक वर्कर अक्सर बंद दरवाजों के पीछे अकेले काम करते हैं तो उनकी आवाज अनसुनी रह जाती है. उनके पास फैक्ट्री या दफ्तर में काम करने वालों की तरह हक नहीं. न तो उन्हें न्यूनतम वेतन मिलता है, न ही जरूरी छुट्टियां. हालात तब और बिगड़ जाते हैं, जब घरेलू नौकर विदेश में काम करने लगें. कई बार वे अपने मालिक पर पासपोर्ट चुरा लेने, या मारपीट करने जैसे आरोप लगाते हैं. ताजा मामला भी कुछ ऐसा ही है.
पूर्व भारतीय राजदूत पर आरोप
भारतीय राजदूत नवदीप सूरी ने 2015 से अगले एक साल तक ऑस्ट्रेलिया में सर्विस दी. इस दौरान भारतीय महिला नौकरानी सीमा शेरगिल उनके घरेलू कामकाज करती रही. सीमा ने सालभर बाद ही सूरी पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना था कि अधिकारी उससे गुलामों जैसा व्यवहार करते थे. उसका पासपोर्ट अपने कब्जे में लेकर वे उससे हफ्ते के सातों दिन काम करवाते रहे. ये रवैया 13 महीने चला. सीमा ने बताया कि वे बाहर भी केवल तभी जा पाती थीं, जब सूरी के कुत्ते को घुमाना हो. लंबे समय काम के बाद भी उन्हें काफी कम वेतन दिया गया.
अदालत ने पाया दोषी
सीमा का मामला ऑस्ट्रेलिया की कोर्ट में पहुंचा. अब अदालत ने सूरी को फेयर वर्क एक्ट के तहत दोषी पाते हुए दो महीनों में करीब 53 लाख रुपए जुर्माना भरने को कहा है.
वैसे इस मामले का एक और एंगल भी है. भारतीय विदेश मंत्रालय का आरोप है कि सीमा ने ऑस्ट्रेलियाई सिटिजनशिप पाने के ये हथकंडे अपनाए. उनके सारे आरोप गलत थे. खैर, ये मामला जो भी हो, लेकिन भारत से विदेश पहुंचे डोमेस्टिक हेल्प आसान जिंदगी नहीं जीते. भारत में तो इस सेक्टर के कामगारों के लिए पक्का वेतन नहीं, लेकिन क्या दूसरे देशों में भी ऐसा है?

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