
'वापस लौट आओ, लेकिन...', भारत में मौजूद शेख हसीना से अंतरिम सरकार ने क्या अपील की?
AajTak
मीडिया से बात करते हुए गृह मामलों के सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल (रिटायर्ड) एम सखावत हुसैन ने कहा, "आप (शेख हसीना) खुद से गईं, आपको अपने देश वापस आना चाहिए, लेकिन कोई हंगामा न करें क्योंकि फिर लोग और ज्यादा नाराज होंगे."
बांग्लादेश (Bangladesh) की अंतरिम सरकार के गृह मामलों के सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल (रिटायर्ड) एम सखावत हुसैन ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से देश वापस लौटने की गुजारिश की है. हालांकि, उन्होंने उनसे कोई भी 'हंगामा' न करने की बात कही है क्योंकि इससे लोगों में और ज्यादा गुस्सा भड़क सकता है.
मीडिया से बात करते हुए एम सखावत हुसैन ने कहा, "आप (शेख हसीना) खुद से गईं, आपको अपने देश वापस आना चाहिए, लेकिन कोई हंगामा न करें क्योंकि फिर लोग और ज्यादा नाराज होंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि आपको (शेख हसीना) को वापस आना चाहिए. देश को अराजकता की तरफ नही धकेलें, नए चेहरों के साथ अपनी पार्टी फिर से शुरू करें."
पिछले दिनों बांग्लादेश में हिंसा भड़कने के बाद शेख हसीना प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था और देश छोड़कर भारत चली गईं. भारत में उन्हें कुछ वक्त तक रहने की छूट दी गई थी लेकिन ब्रिटेन जाने को लेकर हल नहीं निकलने के बाद उनके रुकने का वक्त बढ़ाया गया. शेख हसीना मौजूदा वक्त में गाजियाबाद के हिंडन एयर बेस पर रुकी हुई हैं.
मोहम्मद यूनुस ने संभाली जिम्मेदारी
शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद देश का माहौल और ज्यादा बिगड़ गया. इसके बाद अंतरिम सरकार का गठन किया गया और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया गया.
यह भी पढ़ें: ढाका छोड़ने से भारत पहुंचने तक, जानें कैसे बीते शेख हसीना के वो 8 घंटे

इजरायल की Haifa Refinery पर हुए ईरानी हमले में अहम बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है. हमला रिफाइनरी से जुड़े एक थर्ड-पार्टी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुआ, जो ऑपरेशन के लिए जरूरी था. कंपनी के मुताबिक, कुछ दिनों में फिर से पूरी तरह संचालन शुरू होने की उम्मीद है. ज्यादातर प्रोडक्शन यूनिट्स फिलहाल चालू हैं. देखें वीडियो.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही मीडिया के सामने सेना भेजने की बात से इनकार किया हो, लेकिन 2,200 मरीन सैनिकों के साथ यूएसएस त्रिपोली युद्धपोत का मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ना कुछ और ही इशारा कर रहा है. ट्रंप का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तेल मार्ग को ईरान के कब्जे से छुड़ाना और वहां दबे यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना है. अगर ये सेना तैनात होती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य कदम होगा.

महायुद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है...लेकिन बम-बारूद-गोले थम ही नहीं रहे ..। कहां तो युद्ध ईरान को न्यूक्लियर पावर बनने से रोकने के लिए शुरू हुआ...और कहां ये जंग तेल युद्ध बनकर दुनिया को धधका रहा है...। समझ नहीं आ रहा कि ये जंग किसे धुरंधर बना रहा...एक तरफ तबाही है...तो दूसरी तरफ तेल-गैस-हीलियम संकट...जो हर घर...हर परिवार पर असर डाल रहा है..

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध में अब तेल-गैस के ठिकानों पर हमले से तनाव बढ़ गया है. पूरे दुनिया पर ऊर्जा का संकट बढ़ता जा रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल के बाजार में पहले ही उथल-पुथल मची है. अब दोनों ओर से ताजा हमलों से पूरी दुनिया महंगाई के बड़े संकट की ओर बढ़ती जा रही है. देखें लंच ब्रेक.

चाहे हालात शांति के हों या युद्ध जैसे तनावपूर्ण, जिंदगी कभी नहीं रुकती, इसकी मिसाल लेबनान में देखने को मिली. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच यहां दुनिया के अलग-अलग देशों से आए हजारों लोग, जो काम के सिलसिले में लेबनान में रह रहे हैं, उन्होंने इजरायली हमलों और तमाम चुनौतियों के बावजूद ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया. संघर्ष और अनिश्चितता के बीच भी लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं.

होर्मुज को लेकर तनातनी जारी है. इस बीच छह देशों ने एक बयान जारी किया है ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड्स ने कहा है कि वे हॉर्मुज़ में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं. हालांकि, इटली, जर्मनी और फ्रांस ने बाद में स्पष्ट किया कि वे तत्काल किसी सैन्य सहायता की बात नहीं कर रहे हैं. इन देशों ने क्या शर्त रखी है. जानें.







