
वकीलों के समूह ने सीएए प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई को लेकर योगी आदित्यनाथ की शिकायत की
The Wire
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक और मानवाधिकार वकीलों के एक विशेषज्ञ समूह ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान ‘उत्तर प्रदेश में दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 के बीच किए गए मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के लिए’ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है.
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय आपराधिक और मानवाधिकार वकीलों के एक विशेषज्ञ समूह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ स्विस संघीय अभियोजक (Swiss Federal Prosecutor) के कार्यालय में एक आपराधिक रिपोर्ट दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने मानवता के खिलाफ अपराध किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत में सीएए को लागू किए जाने के लिए हुए विरोध को दबाने के लिए उत्तर प्रदेश में दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 के बीच झूठे कारावास, यातना और नागरिकों की हत्या का आदेश दिया है. पुलिस हिंसा में वृद्धि में मुख्यमंत्री की भूमिका विशेष रूप से 19 दिसंबर 2019 को उनके दिए गए एक भाषण में स्पष्ट है, जिसमें पुलिस को प्रदर्शनकारियों से ‘बदला लेने’ का आह्वान किया गया है. एक भारतीय राज्य अधिकारी होने के बावजूद मुख्यमंत्री को इन अपराधों के लिए राजनयिक छूट प्राप्त नहीं है.
स्विट्जरलैंड के दावोस शहर में विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की बैठक शुरू होने से पहले यह शिकायत दर्ज कराई गई थी. योगी आदित्यनाथ इस बैठक में शामिल होने वाले थे, लेकिन अंतत: वे नहीं गए. जैसा कि आपराधिक रिपोर्ट में निर्धारित किया गया है, इन कृत्यों को मानवता के खिलाफ अपराध माना जा सकता है, क्योंकि उन पर नागरिकों, ज्यादातर मुस्लिम आबादी के खिलाफ व्यापक या व्यवस्थित हमले के हिस्से के रूप में कथित रूप से प्रतिबद्ध होने का आरोप लगाया गया है.
ग्वेर्निका 37 चेम्बर्स (Guernica 37 Chambers) नामक समूह ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान ‘उत्तर प्रदेश में दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 के बीच किए गए मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए’ उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है.
समूह ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में स्विस क्रिमिनल कोड के अनुच्छेद 264 में ‘सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र के सिद्धांत’ का हवाला दिया.

आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर की मां ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पनिहाटी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने पर सहमति दे दी है. प्रदेश भाजपा की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है, जिसमें इस सीट पर कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है.

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में 2017 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक की ख़तरनाक सफाई के दौरान 622 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है. 539 परिवारों को पूरा मुआवज़ा दिया गया, जबकि 25 परिवारों को आंशिक मुआवज़ा मिला. मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश 86 के साथ सबसे ऊपर है, इसके बाद महाराष्ट्र (82), तमिलनाडु (77), हरियाणा (76), गुजरात (73) और दिल्ली (62) का स्थान है.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक 'संदिग्ध आरोपी' होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते. दीपक ने बीते महीने कोटद्वार में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की जा रही बदसलूकी का विरोध किया था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार भले ही एलपीजी की किल्लत से इनकार कर रही है लेकिन गैस एजेंसियों पर लंबी क़तारें हैं. गैस की किल्लत से जूझते लोगों के वीडियो सोशल मीडिया पर आ रहे हैं. वहीं, दिल्ली में कुछ अटल कैंटीन बंद हैं, कई हॉस्टल मेस और गुरुद्वारों में लंगर भी सिलेंडर की कमी प्रभावित हो रहे हैं.




