
'लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते', वायु प्रदूषण पर SC सख्त, पटाखा निर्माताओं को नोटिस
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वायु प्रदूषण के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने करीब आधा दर्जन पटाखा निर्माताओं को कारण बताओ नोटिस भी भेजा है.
देश में बढ़ते वायु प्रदूषण (Air Pollution in India) पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर चिंता जाहिर की है. कोर्ट ने इस बात पर आपत्ति जताई कि लोग मनाही के बावजूद आतिशबाजी करते हैं, जिससे स्थिति और ज्यादा बिगड़ती है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वायु प्रदूषण की परेशानी अस्थमा के मरीज ही समझ सकते हैं. उच्चतम न्यायालय ने सख्त लहजे में यह भी कहा वह लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते. यह परेशानी पैदा करने वाली बात है. पीठ ने कहा कि हम लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते. अस्थमा के मरीजों से पूछो, क्या परेशानी होती है। बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं.

पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस में खानेखाखा की खराब गुणवत्ता की शिकायत पर भारतीय रेलवे ने IRCTC पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. साथ ही संबंधित सर्विस प्रोवाइडर पर 50 लाख का जुर्माना लगाकर उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के आदेश दिए गए हैं. रेलवे ने यात्री सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है.

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सीजेआई सूर्यकांत एक मामले की सुनवाई के दौरान उस वक्त नाराज हो गए, जब याचिकाकर्ता निखिल कुमार पुनिया के पिता ने CJI के भाई को फोन कर दिया. मामला बौद्ध धर्म अपनाकर अल्पसंख्यक आरक्षण मांगने से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही इसे 'नए तरह का धोखा' बताते हुए जांच के आदेश दे चुका है. सीजेआई ने इसे गंभीर कदाचार मानते हुए अवमानना की चेतावनी दी.









