
रूस-यूक्रेन युद्ध ने कैसे दुनिया के सामने खड़ा कर दिया गेहूं का संकट, अब भारत पर सबकी नजर
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wheat shortage: यूक्रेन का ओडेशा बंदरगाह हो या मारियुपोल यहां पर लाखों टन गेहूं कई हफ्ते से पड़ा हुआ है. रूस की नाकेबंदी और बमों की बौछार से ये गेहूं अफ्रीका, यूरोप और एशिया के लोगों तक नहीं पहुंच रहा है. इस वजह से दुनिया भर में गेहूं की कीमतें बढ़ रही है. यूरोपियन निवेश बैंक के प्रमुख की माने तो यूक्रेन के पास 8 बिलियन यूरो के गेहूं का भंडार है.
रोटी, ब्रेड, पास्ता, पिज्जा, बर्गर... जैसी खाने की कई चीजें गेहूं से बनती है. गेहूं दुनिया के लोगों की खाने की थाली में कोई न कोई रूप में मौजूद रहता ही रहता है. लेकिन गेहूं की उपज दुनिया के हर हिस्से में नहीं होती है. इसलिए गेहूं की सप्लाई का बैलेंस कायम रखने के लिए इसका आयात-निर्यात होता रहता है. लेकिन पिछले ढाई महीनों से चल रहे रूस-यूक्रेन की लड़ाई ने गेहूं के सप्लाई चेन को डगमगा दिया है.
यूक्रेन और रूस दोनों ही दुनिया के बड़े गेहूं उत्पादक देश हैं और दोनों ही युद्ध की विभीषिका झेल रहे हैं. रूस ने ब्लैक सी में यूक्रेन के बंदरगाहों की नाकेबंदी और घेराबंदी कर रखी है. लिहाजा यहां से कई हफ्तों से यूरोप को गेहूं की सप्लाई नहीं हो पा रही है. इससे विश्व बाजार में गेहूं की कीमतें बढ़ने लगी है. ऐसी ही परिस्थिति में गेहूं का एक और बड़ा उत्पादक देश भारत ने भी गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दिया है. इससे पहले से ही डवांडोल स्थिति के और भी चरमराने का अंदेशा पैदा हो गया है.
दुनिया का 25 फीसदी गेहूं निर्यात करते हैं रूस और यूक्रेन
रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक देश है. यूक्रेन और रूस मिलकर दुनिया के एक चौथाई गेहूं का निर्यात करते हैं और यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के करोड़ों लोगों का पेट भरते हैं. इन दोनों देशों से सूरजमुखी का बीज, बार्ली और मक्के की सप्लाई भी दुनिया को होती है.
रूस ने पहले ही गेहूं का निर्यात कम कर दिया है
अब इसे राष्ट्रपति पुतिन की प्लानिंग कहें या संयोग लेकिन रूस ने यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने से पहले ही साल 2021 में गेहूं के निर्यात को सीमित कर दिया है. रूस ने गेहूं के निर्यात को कम करने के लिए निर्यात टैक्स लगा दिया है. रूस का तर्क है कि घरेलू बाजार में खाद्यान्न कीमतों पर नियंत्रण के लिए उसने ऐसा कदम उठाया है. रूस के इस कदम से दुनिया के खाद्य बाजार में गेहूं की किल्लत पहले से ही चली आ रही थी.

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