
रूस के बाद अमेरिका पर लटकी आतंकी हमले की तलवार, क्यों ISIS अमेरिका को दुश्मन नंबर 1 मानता है?
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मॉस्को में हाल में हुए आतंकी हमले ने साफ कर दिया कि रूस पर आतंकियों, खासकर ISIS-K का खतरा बना हुआ है. इससे पहले भी रूस के दूतावासों को ये आतंकी गुट निशाना बनाता रहा. लेकिन जैसे-जैसे इस्लामिक स्टेट ताकतवर हो रहा है, सबसे ज्यादा खतरा अमेरिका पर मंडरा रहा है. खुद अमेरिकी रक्षा एक्सपर्ट्स इसपर चेताने लगे हैं. जानिए, इस्लामिक स्टेट की अमेरिका से क्या दुश्मनी है.
22 मार्च को मॉस्को के क्रोकस सिटी हॉल कॉन्सर्ट हॉल में हुए हमले में 134 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी. आतंकी गुट इस्लामिक स्टेट ने इसकी जिम्मेदारी ली है. हमलावर पकड़े जा चुके, साथ ही संदिग्धों से पूछताछ चल रही है, लेकिन रूस की चिंता बनी हुई है. जिस इस्लामिक स्टेट के बारे में माना जा रहा था कि वो लगभग खत्म हो चुका, वो न केवल भीतर पहुंचा, बल्कि इतना नुकसान भी कर गया. क्रेमलिन के बाद अंदेशा जताया जा रहा है कि आतंकी किसी अमेरिकी शहर को टारगेट कर सकते हैं.
अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ दे रहे चेतावनी
रविवार को यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड के पूर्व हेड फ्रैंकलिन मैकेंजी ने दावा किया कि इस्लामिक स्टेट यूएस पर हमलावर हो सकता है. मैकेंजी के अनुसार, खतरा इसलिए भी ज्यादा है कि अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान छोड़ दिया. इससे आतंकियों को वहां पनपने का मौका मिल गया. अब वे पूरी तरह से तैयार हो चुके हैं.
बिल्कुल इसी तरह का बयान यूएस के आर्मी जनरल माइकल एरिक कुरिला ने भी दिया. सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ISIS-K के पास अब अमेरिका और उसके हितों पर अटैक करने की ताकत और मंशा दोनों ही है. आर्मी जनरल ने यहां तक कह दिया कि ऐसा 6 महीने के भीतर भी हो सकता है.
इस्लामिक स्टेट के नाम पर अमेरिका में आखिरी हमला साल 2017 में हुआ था. न्यूयॉर्क में एक ट्रक में बैठे आतंकियों ने साइकिल सवारों पर गाड़ी चला दी थी, हमले में 8 मौतें हुईं, जबकि कई लोग घायल हुए थे. ये आतंकी गुट के पतन के चरम और पतन का दौर था.

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