
रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस के पूर्व अधिकारियों और ADAG ग्रुप पर करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप; एक्सिस बैंक ने दर्ज कराई शिकायत
ABP News
एक्सिस बैंक ने जुलाई 2010 में रिलायंस कैपिटल को 50 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा और 20 करोड़ रुपये की वर्किंग कैपिटल सीमा मंजूर की थी. डिमर्जर के बाद कर्ज RCFL को ट्रांसफर कर दिया गया था.
अनिल धीरभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) की कंपनियों और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) के पूर्व शीर्ष अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. एक्सिस बैंक के वाइस प्रेसिडेंट प्रकाश प्रभाकर राव ने बैंक की ओर से इन कंपनियों और उनके पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और फंड की हेराफेरी (Siphoning of Funds) की गंभीर शिकायत दर्ज कराई है.
शिकायत के अनुसार, एक्सिस बैंक ने जुलाई 2010 में रिलायंस कैपिटल को 50 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा और 20 करोड़ रुपये की वर्किंग कैपिटल सीमा मंजूर की थी. साल 2017 में डिमर्जर के बाद यह कर्ज रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) को ट्रांसफर कर दिया गया. जनवरी 2020 में बैंक ने इस खाते को NPA (Non Performing Asset) घोषित कर दिया था.
फॉरेंसिक ऑडिट में हुए चौंकाने वाले खुलासेबैंक ऑफ बड़ौदा के नेतृत्व में कराए गए 'ग्रांट थॉर्नटन इंडिया LLP' के फॉरेंसिक ऑडिट में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं. लगभग 1,867.89 करोड़ रुपये की कर्ज राशि को बिना किसी ठोस व्यावसायिक आधार के ADAG ग्रुप से जुड़ी मुखौटा (PILE) कंपनियों के कर्ज चुकाने के लिए डायवर्ट किया गया. ऑडिट में पाया गया कि 1,199.29 करोड़ रुपये की राशि को जटिल लेनदेन और बिचौलियों के माध्यम से घुमाकर (Round Tripping) वापस RCFL को भेजा गया ताकि फंड के वास्तविक उपयोग को छुपाया जा सके.
कर्ज की शर्तों को ताक पर रखकर 344.89 करोड़ रुपये म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए और 200.38 करोड़ रुपये अन्य ऋणों के आवंटन में खर्च किए गए. कंपनी ने बैंक के सामने अपनी वास्तविक आर्थिक स्थिति और ADAG ग्रुप के साथ अपने संबंधों के बारे में गलत जानकारी साझा की.













