
राहुल गांधी ने कहीं गुजरात चुनाव में उतरने में देर तो नहीं कर दी?: दिन भर पॉडकास्ट
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राहुल गांधी ने क्या गुजरात चुनाव में देर कर दी, क्यों हर बार खड़ी हो जाती है NPA की समस्या, MCD चुनाव में क्यों आम आदमी पार्टी ने बदली रणनीति, क्या आपकी सैनिटरी नैपकिन में कैंसर है, सुनिए 'दिन भर' में
आदिवासियों की शरण में राहुल!
गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए आज का दिन हाईप्रोफाइल रैलियों वाला रहा. राहुल गांधी की आज पहली चुनावी रैली थी गुजरात में, जो उन्होंने सूरत में की, इसके बाद राजकोट में भी रैली की. उन्होंने कहा कि बीजेपी आदिवासियों को वनवासी कहती है, जबकि दोनों में अंतर होता है. उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भारतीय जनता पार्टी के लिए वोट मांगने के लिए सुरेन्द्रनगर, नवसारी और जाबुसार पहुंचे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को मुझे औकात दिखाने वाली बात छोड़ मुद्दों की बात करनी चाहिए.
गुजरात चुनाव के पहले चरण की वोटिंग एक दिसंबर को है, गिनती के 10 दिन बचे हैं, 89 सीटों पर वोट डाले जाने हैं. दूसरे चरण की वोटिंग 5 दिसम्बर को 93 सीटों पर होनी है. पर गुजरात चुनाव को लेकर कांग्रेस कितनी सीरियस है, इन सवालों को बल मिला है क्योंकि राहुल गांधी के देर तक प्रचार अभियान से ग़ायब रहे. उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा को प्राथमिकता दी, जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में वो ख़ुद प्रचार अभियान को लीड कर रहे थे. गुजरात में राहुल गांधी की एंट्री जब हुई है, क्या उन्होंने देर कर दी है या अब भी बहुत कुछ बचा हुआ है पार्टी के लिए? इंडिया टुडे टीवी के नेशनल अफेयर्स एडिटर राहुल श्रीवास्तव से 'दिन भर' में सुनने के लिए क्लिक करे.
बैकों के दस लाख करोड़ डूबे!
देश के सभी प्राइवेट और सरकारी बैंको ने पिछले पांच साल में 10 लाख करोड़ के लोन को राइट ऑफ कर दिया यानी की ये रकम बट्टा खातों में चली गई. यानी सरकार ने मान लिया है कि इस पूरी रकम की रिकवरी नहीं होगी. एक अंग्रेज़ी अख़बार को एक आरटीआई के जवाब में सरकार ने ये बताया गया है. इस दौरान सरकारी बैंकों ने सबसे ज्यादा 7 लाख 34 हजार 738 करोड़ रुपयों को राइट ऑफ किया जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया का था. लेकिन सवाल है कि बैंक ऐसा करके हासिल क्या करना चाहते है? दरअसल, बैंको के ऐसा करने से उनकी बैलेंस शीट से NPA कम दिखने लगते है.

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