
राहुल गांधी के 'महाराष्ट्र चुनाव फिक्सिंग' वाले आरोपों को ECI ने कहा बेतुका, 4 पॉइंट्स में किया पलटवार
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राहुल गांधी के आरोपों का खंडन करते हुए ईसीआई ने कहा कि कांग्रेस नेता द्वारा तथ्यों को बार-बार पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है. चुनाव आयोग ने कहा कि इस तरह के तथ्यहीन आरोप न केवल कानून के प्रति पूर्ण अवहेलना दिखाता है, बल्कि पार्टी द्वारा नियुक्त हजारों प्रतिनिधियों की ईमानदारी पर भी सवाल खड़े करता है और लाखों चुनाव अधिकारियों का मनोबल गिराता है, जो चुनावों के दौरान अथक मेहनत और पारदर्शी तरीके से काम करते हैं.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के X पर इस पोस्ट के बाद कि नवंबर 2024 में महाराष्ट्र में होने वाले चुनाव में 'धांधली' हुई है, भारत के चुनाव आयोग ने उनके दावों का बिंदुवार खंडन करते हुए कहा कि तथ्यों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है. ईसीआई ने कहा, 'महाराष्ट्र की मतदाता सूची के खिलाफ लगाए गए निराधार आरोप कानून के शासन का अपमान है. चुनाव आयोग ने 24 दिसंबर 2024 को ही कांग्रेस को दिए गए अपने जवाब में ये सभी तथ्य सामने रखे थे, जो ईसीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि बार-बार ऐसे मुद्दे उठाते समय इन सभी तथ्यों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है.'
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र चुनाव को लेकर क्या दावा किए?
राहुल गांधी ने भाजपा पर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पांच चरणों वाली प्रक्रिया के माध्यम से धांधली करने का आरोप लगाया. उन्होंने चुनाव आयोग से बीजेपी की सांठगांठ होने और मतदान प्रतिशत को बढ़ा-चढ़ाकर बताने का आरोप लगाया है. कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि इस साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में भी ऐसा ही पैटर्न दोहराया जा सकता है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी चिंताओं को साझा करते हुए, राहुल गांधी ने एक समाचार पत्र में लिखे गए अपने लेख का लिंक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र में व्यवस्थित चुनावी हेरफेर का वर्णन किया था. 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को 288 में से 235 सीटों के साथ शानदार जीत मिली. ये नतीजे भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुए, जो 132 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.
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चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावों को बेतुका बताया
राहुल गांधी के आरोपों का खंडन करते हुए ईसीआई ने कहा कि कांग्रेस नेता द्वारा तथ्यों को बार-बार पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है. चुनाव आयोग ने कहा कि इस तरह के तथ्यहीन आरोप न केवल कानून के प्रति पूर्ण अवहेलना दिखाता है, बल्कि पार्टी द्वारा नियुक्त हजारों प्रतिनिधियों की ईमानदारी पर भी सवाल खड़े करता है और लाखों चुनाव अधिकारियों का मनोबल गिराता है, जो चुनावों के दौरान अथक मेहनत और पारदर्शी तरीके से काम करते हैं. मतदाताओं का समर्थन नहीं मिलने के कारण अपनी पार्टी के खिलाफ चुनाव नतीजे आने के बाद, यह कहकर चुनाव आयोग को बदनाम करने की कोशिश करना पूरी तरह से बेतुका है कि चुनाव आयोग ने 'समझौता' कर लिया है.'

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