
राहुल गांधी की नागरिकता पर HC सख्त, केंद्र सरकार को 'जांच फाइल' पेश करने का आदेश
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कांग्रेस नेता और रायबरेली सांसद राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक बड़ा कदम उठाया है. अदालत ने भारत सरकार को राहुल गांधी की नागरिकता संबंधी जांच फाइल 19 मार्च तक पेश करने का आदेश दिया है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले में नई हलचल मच गई है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता (भारतीय और ब्रिटिश) को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बड़ा कदम उठाया है. कोर्ट ने भारत सरकार से राहुल गांधी की नागरिकता संबंधी जांच फाइल को पेश करने का आदेश दिया है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी. वहीं, याचिकाकर्ता बीजेपी नेता जिग्नेश शिशिर ने कोर्ट के इस फैसले को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ये लंबे वक्त से चल रही लड़ाई का नतीजा है. ये विवाद मई 2024 से शुरू हुआ, जब राहुल गांधी ने रायबरेली से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. जिग्नेश शिशिर ने राहुल गांधी के नामांकन हलफनामे पर आपत्ति जताई, उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल ब्रिटिश नागरिक हैं. शिशिर ने रायबरेली कोतवाली में एफआईआर दर्ज करने की मांग की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. इसके बाद मामला स्थानीय अदालतों से होता हुआ हाईकोर्ट पहुंच गया.
2024 से जारी है लड़ाई याचिकाकर्ता ने आज तक से बातचीत करते हुए कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई और बताया, 'हम मई 2024 से इस लड़ाई में हैं. राहुल गांधी चुनाव जीते और सांसद बने, लेकिन हमने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. कोर्ट ने पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क करने को कहा. जुलाई 2024 में हमने गृह मंत्रालय के विदेशी नागरिक विभाग को सबूत सौंपे.' उन्होंने दावा किया कि हमने भारत सरकार को राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता होने के सबूत दिए है. हमने इस संबंध में ब्रिटेन नागरिक से भी संपर्क किया तो पता चला 2022 से राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिकता के बारे में एक फाइल खुली हुई है. वहां पर कनाडा के रहने वाले किसी शख्स ने ब्रिटिश सरकार से शिकायत की है.
'राउच विंची' के नाम से अलग पासपोर्ट उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने अपने ब्रिटिश कंपनी के दस्तावेजों में खुद को ब्रिटिश नागरिक घोषित किया है. शिशिर के अनुसार, ब्रिटेन के नागरिकता रिकॉर्ड में राहुल गांधी का नाम दर्ज है और उनके पास 'राउल विंची' के नाम से एक अलग पासपोर्ट भी है. याचिकाकर्ता ने दावा किया कि राहुल गांधी और राउल विंची की जन्मतिथि (19 जून 1970) और बैंक विवरण एक ही हैं. इसी आधार पर उन्होंने राहुल गांधी का पासपोर्ट जब्त करने और उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है.
रायबरेली पुलिस को दी थी अर्जी याचिकाकर्ता का कहना है कि इस मामले में पहले रायबरेली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए अर्जी दी गई थी. पुलिस जांच में सुबूत दिए जाने के बावजूद मामला दर्ज नहीं हुआ, जिसके बाद इसे रायबरेली की एमपी-एमएलए कोर्ट ले जाया गया. स्थानीय वकीलों के दबाव के कारण केस लखनऊ ट्रांसफर हुआ, जहां कोर्ट ने नागरिकता पर निर्णय लेने में असमर्थता जताई. इसके बाद जिग्नेश शिशिर ने हाईकोर्ट का रुख किया. वर्तमान सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कहा कि उन्हें इस मामले में एफआईआर दर्ज करने पर कोई आपत्ति नहीं है. याचिका में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से प्राप्त एमफिल डिग्री का भी जिक्र है. दावा किया गया है कि यह डिग्री 'राउल विंची' के नाम से है और राहुल गांधी ने खुद 2004 के अमेठी हलफनामे में इसे स्वीकार किया था.
182 दिन विदेश में रहते हैं शिशिर का आरोप है कि राहुल गांधी साल में 182 दिन से ज्यादा विदेश में रहते हैं, जिससे वो तकनीकी रूप से एनआरआई (NRI) बन गए हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि एक विदेशी नागरिक 22 साल से भारतीय संसद में बैठकर गोपनीय जानकारी कैसे प्राप्त कर सकता है. वहीं, हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है. 19 मार्च को होने वाली सुनवाई में अगर नागरिकता संबंधी फाइल पेश होती है तो ये राहुल गांधी के राजनीतिक करियर के लिए निर्णायक साबित हो सकती है. याचिकाकर्ता ने गृह मंत्रालय की कार्रवाई पूरी होने तक राहुल गांधी के विदेश जाने पर रोक लगाने की भी अपील की है. कानून के जानकारों का मानना है कि यदि दोहरी नागरिकता के प्रमाण मिलते हैं तो भारतीय कानून के तहत उनकी सांसदी और नागरिकता दोनों पर संकट आ सकता है.

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