
राहुल गांधी की 'ड्रीम' बनाम हरियाणा की लोकल फाइटिंग... AAP-कांग्रेस की डील में कहां फंसा है पेच?
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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी हरियाणा चुनाव में लोकसभा चुनाव वाला गठबंधन आगे बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन लोकल नेता इसका विरोध कर रहे हैं. नामांकन शुरू हो चुका है और आम आदमी पार्टी के साथ सीट शेयरिंग फॉर्मूला भी तैयार नहीं हो सका है. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की डील में कहां पेच फंसा है?
लोकसाभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावनाएं टटोलने के लिए कहा था. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी, दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर बातचीत भी शुरू हो गई. नामांकन की प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है लेकिन दोनों दलों के बीच गठबंधन का ऐलान अब तक नहीं हो सका है.
राहुल गांधी के बयान के बाद जिस तेजी से दोनों दलों ने दीपेंद्र हुड्डा और राघव चड्ढा को सीट शेयरिंग की जिम्मेदारी सौंपी, माना जा रहा था कि एक-दो दिन में ही ऐलान हो जाएगा. अब सवाल है कि जब दोनों ही पार्टियां इतनी गंभीर हैं तो फिर पेच कहां फंस रहा है, क्यों गठबंधन पर ऐलान में देर हो रही है? इसे तीन पॉइंट से समझा जा सकता है.
1- आम आदमी पार्टी की डिमांड
कांग्रेस ने हालिया लोकसभा चुनाव भी आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन कर लड़ा था. कांग्रेस ने सूबे की नौ सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और एक सीट आम आदमी पार्टी के हिस्से में आई थी- कुरुक्षेत्र. हरियाणा में विधानसभा की कुल 90 सीटें हैं और एक लोकसभा क्षेत्र में औसतन नौ विधानसभा सीटें आती हैं. आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव के 9:1 वाले फॉर्मूले से ही सीट शेयरिंग चाहती है. 10 परसेंट के इस फॉर्मूले के आधार पर आम आदमी पार्टी नौ विधानसभा सीटों की मांग कर रही है.
2- नौ सीटें देने को तैयार नहीं हरियाणा कांग्रेस
आम आदमी पार्टी जितनी सीटें मांग रही है, हरियाणा कांग्रेस के नेता उतनी सीटें देने पर सहमत नहीं हैं. हरियाणा कांग्रेस चाहती है कि आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और लेफ्ट को अगर साथ लेना ही है तो जितनी कम से कम सीटों पर सहमत किया जा सकता है, किया जाए. गठबंधन सहयोगियों के खाते की सीटें सिंगल डिजिट में ही रहें, डबल डिजिट में न जाएं.

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