
रायपुर से रांची तक सियासी हलचल... छत्तीसगढ़ से लौटे 4 मंत्री, CM रद्द कर सकते हैं दौरा
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झारखंड की सियासी गर्माहट की तपिश छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर तक महसूस की जा रही है. छत्तीसगढ़ से चार मंत्री वापस रांची लौट आए हैं वहीं एक और विधायक झारखंड से रायपुर के उस रिसॉर्ट पहुंच गया है जिसमें यूपीए के विधायक ठहरे हुए हैं. बढ़ी सियासी हलचल के बीच खबर ये भी है कि सीएम सोरेन अपना रायपुर दौरा रद्द कर सकते हैं.
झारखंड में राजनीति गर्माई हुई है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधायकी पर अयोग्य घोषित किए जाने की तलवार लटक रही है. ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में निर्वाचन आयोग ने अपनी सिफारिश राज्यपाल को भेज दी है. कहा जा रहा है कि निर्वाचन आयोग ने हेमंत सोरेन की विधानसभा की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की है लेकिन अब तक इसे लेकर राज्यपाल की ओर से कोई भी ऐलान नहीं किया गया है.
हेमंत सोरेन की विधायकी पर संकट के बीच सूबे में सियासी उथल-पुथल मच गई. हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन के घटक दल विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश के कथित दावों को लेकर एक्टिव मोड में आ गए और आनन-फानन में सभी विधायकों को कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ के रायपुर विशेष विमान से भेज दिया गया.
सभी विधायकों को झारखंड से छत्तीसगढ़ भेजने के सरकार के फैसले पर अब हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के ही विधायक ने सवाल उठाए हैं. झामुमो के विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने अपनी ही पार्टी की सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि झारखंड की राजनीति दूसरे राज्य से नहीं होनी चाहिए.
उन्होंने ये भी कहा कि क्या सरकार को अपने सिस्टम पर विश्वास नहीं है? दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भी रायपुर जाने का कार्यक्रम था लेकिन अब खबरें इस तरह की आ रही हैं कि वे अपना रायपुर दौरा रद्द कर सकते हैं. हेमंत सोरेन अपनी ही सरकार और अपने ही सिस्टम पर भरोसा न होने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अपना रायपुर दौरा रद्द कर सकते हैं.
कांग्रेस विधायकों के विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संपर्क में होने को लेकर झारखंड कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कहा कि आखिर आदमी ही विधायक होता है. जब उसको प्रलोभन दिया जाता है तो कुछ लोग डगमगा जाते हैं. यह स्थिति न आए. उन्होंने दावा किया कि प्रलोभन देने के प्रयास भी चल रहे हैं. जो हालात हैं, राजनीतिक रणनीति के तहत यह निर्णय लिया गया है. आजकल मोबाइल है तो संपर्क रहता होगा. उसमें क्या कर सकते हैं.
झारखंड कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि अब हम ये कैसे बोल सकते हैं कि उनके संपर्क में हैं या नहीं. जो चीजें हैं, वह तो दिखाई देती हैं. इसलिए रणनीति के तहत यह किया गया है. राज्यपाल के ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में जो भी हालात बनेंगे जो भी झारखंड मुक्ति मोर्चा मुख्यमंत्री तय करेगा. हमारा गठबंधन उनके साथ है.

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