
रणबीर की 'रामायण' फिल्म पर बोले रामानंद सागर के पोते- बनाने का अधिकार सबको, लेकिन...
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1987 में अरुण गोविल को भगवान राम के रोल में लेकर आया 'रामायण' सीरियल आज भी आइकॉनिक है. इस शो के मेकर, स्वर्गीय रामानंद सागर के पोते अमृत सागर ने अब रणबीर कपूर की 'रामायण' को लेकर अपनी राय रखी है. उन्होंने कहा कि रामायण बनाने का अधिकार सभी को है बस उन्हें ये काम ईमानदारी से करना चाहिए.
रणबीर कपूर स्टारर, डायरेक्टर नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण' पिछले साल से ही लगातार खबरों में बनी हुई है. कुछ वक्त पहले खबरें आई थीं कि इसका शूट शुरू हो चुका है और कुछ तस्वीरें भी आईं, जिन्हें कथित तौर पर 'रामायण के सेट से लीक' बताया गया.
पिछले कुछ सालों में ये पहली बार नहीं है जब प्रभु श्रीराम की कहानी को स्क्रीन पर एडाप्ट करने की कोशिश की जा रही हो. लेकिन जब भी इसपर कोई प्रोजेक्ट शुरू होता है, लोगों को दूरदर्शन पर देखा, रामानंद सागर का टीवी सीरियल 'रामायण' जरूर याद आता है. 1987 में अरुण गोविल को भगवान राम के रोल में लेकर आया ये सीरियल आज भी आइकॉनिक है. इस शो के मेकर, स्वर्गीय रामानंद सागर के पोते अमृत सागर ने अब रणबीर कपूर की 'रामायण' को लेकर अपनी राय रखी है.
कहानी नहीं, लोगों के जीवन का अंग है रामायण अमृत ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बात करते हुए पिछले साल आई, प्रभास की फिल्म 'आदिपुरुष' की आलोचना की, जो रामायण पर आधारित थी. खराब डायलॉग और बुरे विजुअल इफेक्ट्स के लिए 'आदिपुरुष' की बहुत आलोचना हुई थी. इस बारे में अमृत सागर ने कहा कि रामायण बनाते हुए हर किसी को ये बात याद रखनी चाहिए कि 'उन्हें कहानी को आखिरी शब्द तक एकदम सटीक रखना होगा.'
उन्होंने आगे कहा, 'क्योंकि ये एक कहानी नहीं है. ये लोगों के जीवन का हिस्सा है. शहरों और मेट्रोज में रहते हुए हम ये भूल गए हैं कि भारत में एक बड़ा तबका है जो हर रोज इसका टेक्स्ट पढ़ता है. उन्हें इस टेक्स्ट का एक-एक शब्द याद है. तो हमारे लिए किसी ऐसी चीज को बदलना जो युगों पहले लिखी गई है और ग्रन्थ के रूप में स्वीकार की जा चुकी है... ऐसा है जैसे बाइबिल में बदलाव करना. टेक्स्ट जैसा है, उसे वैसा ही फॉलो कीजिए और उसके दायरे में अपना काम ईमानदारी से कीजिए.'
सभी को है रामायण बनाने का अधिकार जब अमृत से नितेश तिवारी की 'रामायण' फिल्म के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि रामायण बनाने का अधिकार सभी को है बस उन्हें ये काम ईमानदारी से करना चाहिए. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हर किसी को रामायण बनानी चाहिए. क्यों नहीं? इसपर किसी का कॉपीराइट नहीं है. मेरी बस एक सलाह है कि इसे ईमानदारी से बनाएं. रामायण को इस तरह न बनाएं कि 'अब मैं इस व्यक्ति के या उस व्यक्ति के पर्सपेक्टिव से रामायण बनाऊंगा. रामायण ये नहीं है. ये राम के पर्सपेक्टिव से है इसीलिए इसका नाम रामायण है.'
अमृत ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि इस देश में सदियों से रामलीलाएं हो रही हैं और वो पूरी तरह से कहानी को फॉलो करते हैं.

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