
'ये ठीक नहीं है... उचित नहीं है...' एक ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में कइयों पर निशाना साध गईं मायावती
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बसपा प्रमुख मायावती ने गुरुवार को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. उन्होंने इंडिया गठबंधन में शामिल सपा के बयान पर पलटवार किया. मायावती ने कहा, इंडिया गठबंधन की बैठक में बीएसपी पर की गई टिप्पणी अनुचित है. कोई नहीं जानता कि कब-किसकी जरूरत पड़ जाए. उन्होंने कहा, गठबंधन में बीएसपी समेत जो भी पार्टी शामिल नहीं है, उन पर कोई भी टिपण्णी गलत है. भविष्य में कब किसकी जरूरत पड़ जाए. सपा इसका जीता जागता उदाहरण है.
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इंडिया गठबंधन में सपा प्रमुख अखिलेश के रुख पर पलटवार किया है. मायावती ने विपक्षी दलों के गठबंधन को भी चेताया और लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई बार 'ये ठीक नहीं है या ये उचित नहीं है' कहकर निशाना साधा. INDIA मीटिंग पर मायावती ने कहा, इस गठबंधन में बीएसपी समेत अन्य जो पार्टियां शामिल नहीं हैं, उनके बारे में किसी को भी बेफिजूल बात या कोई भी टीका टिप्पणी करना उचित नहीं है. इनसे अलायंस के नेताओं को बचना चाहिए. यही मेरी उनको सलाह भी है. बसपा प्रमुख ने सीधे सपा का भी जिक्र किया.
मायावती ने कहा, भविष्य में देश हित में कब- किसको, किसकी जरूरत पड़ जाए- ये कुछ कहा नहीं जा सकता है. फिर ऐसे लोगों और पार्टियों को शर्मिंदगी उठानी पड़ जाए- ये ठीक नहीं है. इस मामले में खासतौर पर समाजवादी पार्टी इसका जीता-जागता उदाहरण भी है. इसके अलावा, यहां मैं यह भी कहना चाहूंगी कि हमारी पार्टी पूर्ण रूप से धर्मनिरपेक्ष है. हमारे देश में विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं. उनके अपने अलग-अलग आस्था स्थल बने हैं, इन सभी स्थलों का हमारी पार्टी बीएसपी ने हमेशा सम्मान किया है. यूपी के अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर का जो अगले महीने उद्घाटन होने जा रहा है, उससे हमारी पार्टी को कोई ऐतराज नहीं है.
'मायावती ने बेवजह टिप्पणी से पहले याद दिलाया सपा-बसपा गठबंधन'
दरअसल, मायावती ने सपा का उदाहरण के तौर पर जिक्र इसलिए किया है, क्योंकि यूपी की राजनीति में सपा और बसपा में बड़ा प्रतिद्वंदी माना जाता रहा है. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव से ऐन पहले दोनों दलों ने हाथ मिला लिया था और गठबंधन में चुनाव लड़ा था. हालांकि, आम चुनाव बाद ही दोनों दल एक बार फिर दूर हो गए थे और अलायंस तोड़ दिया था. 25 साल पहले 1993 में सपा और बसपा के बीच गठबंधन हुआ था. तब सपा की कमान दिवंगत मुलायम सिंह यादव और बसपा की कमान दिवंगत कांशीराम के हाथाें में थी.
'बीएसपी धर्म निरपेक्ष पार्टी'
बसपा प्रमुख ने आगे कहा, यहां अयोध्या में कोर्ट के आदेश पर सरकार द्वारा निर्धारित की गई जमीन पर जब भी मस्जिद का निर्माण होता है, तब उसके उद्घाटन का भी हमारी पार्टी ऐतराज नहीं करेगी. हमारी पार्टी सभी धर्मों के स्थलों का पूरा सम्मान करती है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसकी आड़ में जो घिनौनी राजनीति की जा रही है, वो अति दुखद और चिंतनीय भी है. ये नहीं होना चाहिए. क्योंकि इससे अपना देश कमजोर होगा. मजबूत नहीं. इससे लोगों में आपस में नफरत पैदा होती है, जो कतई उचित नहीं है. इस बात का भी सभी को पूरा ध्यान रखना चाहिए.

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