
'मोहल्ले का ट्यूटर बॉय... 2 साल पहले अचानक हो गया गायब', ललित झा के बारे में पिता और पड़ोसी ने क्या-क्या बताया
AajTak
Parliament Security Breach: संसद कांड के मास्टरमाइंड ललित झा की फैमिली सदमे में है. ललित के पिता और भाई ने कहा कि हम कभी सोच भी नहीं सकते थे कि ललित ऐसा काम कर सकता है. मीडिया में उसकी तस्वीरें देखकर हम हैरान हैं. वहीं ललित के पड़ोसियों ने कहा कि ललित हमेशा रिजर्व नेचर का रहा है. वह लोगों से बहुत कम सोशल रहता था.
संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के मास्टरमाइंड ललित मोहन झा के बड़े भाई शंभू झा ने कहा कि इस घटना में ललित की संलिप्तता पर पूरा परिवार हैरान है. हमें यकीन नहीं हो रहा कि वो ऐसा कर सकता है. बता दें कि ललित गुरुवार की शाम महेश नाम के व्यक्ति के साथ नई दिल्ली के एक थाने में पहुंचा था, जहां उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर स्पेशल सेल को सौंप दिया था.
बता दें कि बुधवार को साल 2001 में संसद पर हुए आतंकवादी हमले की बरसी पर दो लोग शून्यकाल के दौरान विजिटर गैलरी से लोकसभा कक्ष में कूद गए थे. इस दौरान दोनों आरोपियों ने कनस्तरों से पीले रंग का धुआं छोड़ा और नारेबाजी की थी. उसी दौरान सांसदों ने दोनों आरोपियों को पकड़ लिया था.
ललित के भाई शंभू झा ने कहा कि हमें नहीं पता कि ललित इस सब में कैसे शामिल हुआ. वह हमेशा इन सब चीजों से दूर रहता था. वह बचपन से ही शांत स्वभाव वाला और अंतर्मुखी रहा है. वह टीचर होने के अलावा गैर सरकारी संगठनों से जुड़ा था, यह तो हमें पता था. शंभू ने कहा कि इस घटना के बाद टेलीविजन चैनलों पर उसकी तस्वीरें देखकर हम हैरान हैं.
यहां देखें वीडियो
बुधवार रात से शंभू के पास लगातार कॉल्स आ रहे हैं. पुलिस के साथ ही रिश्तेदार ललित के बारे में पूछताछ कर रहे हैं. शंभू ने कहा कि हमने ललित को आखिरी बार 10 दिसंबर को देखा था. उस समय मैं गृहनगर बिहार के लिए निकला था. तब ललित सियालदह स्टेशन पर हमें छोड़ने आया था. इसके अगले दिन ललित ने हमें फोन किया और कहा कि किसी काम से दिल्ली जा रहा हूं. उसके बाद से हमारी उससे कोई बात नहीं हुई.
ललित के पिता बोले- मुझे नहीं पता कि ये कैसे हो गया

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









