
मोदी सरकार के इस फैसले से क्यों मची पूरी दुनिया में हलचल?
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भारत सरकार ने 20 जुलाई को गैर-बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया जिसका प्रभाव पूरी दुनिया पर देखा जा रहा है. अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में लोग पैनिक खरीददारी कर रहे हैं जिसे देखते हुए वहां की दुकानों ने चावल खरीद की सीमा तय कर दी है. IMF ने भी चावल निर्यात पर प्रतिबंध को लेकर भारत से एक अपील की है.
भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने गैर-बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है जिसके बाद से अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में चावल की खरीद के लिए अफरा-तफरी का माहौल है. इसे लेकर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया के सुपरमार्केट्स ने चावल की खरीद को लेकर एक सीमा तय कर दी है जिससे चावल की पैनिक खरीददारी को रोका जा सके. हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत से आग्रह किया कि वो गैर-बासमती चावल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा दे.
आईएमएफ का कहना है कि ऐसे फैसले पूरी दुनिया में हानिकारक प्रभाव डालते हैं. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरींचस ने कहा कि इस प्रकार के प्रतिबंधों से दुनिया के बाकी देशों में खाद्य कीमतों में अस्थिरता बढ़ने की संभावना है.
उन्होंने कहा कि भारत के प्रतिबंध का वैसा ही प्रभाव होगा जैसा कि रूस-यूक्रेन के बीच काला सागर समझौता टूटने से हो रहा है. गेहूं के शीर्ष निर्यातकों में शामिल यूक्रेन काला सागर के जरिए अपना गेहूं विश्व बाजार में भेजता है लेकिन हाल ही में रूस ने इस समझौते को रद्द कर दिया है जिस कारण अचानक से गेहूं की कीमतों में भारी उछाल आया है. गौरींचस ने कहा कि 2023 में वैश्विक अनाज की कीमतें 10-15% तक बढ़ सकती हैं.
उन्होंने कहा, 'यह निश्चित रूप से ऐसी कुछ चीजों में शामिल है जिन्हें हम इस प्रकार के निर्यात प्रतिबंधों को हटाने के लिए प्रोत्साहित करेंगें. क्योंकि ऐसे प्रतिबंध विश्व स्तर पर हानिकारक हो सकते हैं.'
वहीं, समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए आईएमएफ रिसर्च डिपार्टमेंट के डिवीजन चीफ डेनियल ले ने कहा कि अगर भारत की तरह दुनिया के बाकी देश भी इस तरह के प्रतिबंध लगाने लगें तो वैश्विक महंगाई में बढ़ोतरी होगी.
उन्होंने कहा, 'अगर भारत के साथ-साथ दूसरे देश भी सामानों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने लगे.....हम समझते हैं कि भारत की घरेलू जरूरतें हैं लेकिन अगर आप इसके वैश्विक प्रभाव को देखते हैं तो यह महंगाई को बढ़ाने का काम करेगा. इसलिए हमारा मानना यह है कि इस तरह के प्रतिबंधों को जल्द से जल्द चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाना चाहिए.'

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