
होर्मुज के बाद अब 'बाब अल-मंडेब' स्ट्रेट पर संकट! ईरान की नई धमकी ने बढ़ा दी दुनियाभर की टेंशन
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ईरानी मीडिया की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, एक सैन्य सूत्र ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के द्वीपों पर हमला हुआ तो वह 'बाब अल-मंडेब' स्ट्रेट में एक नया मोर्चा खोल सकता है. यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है. यूरोप, एशिया और मिडिल ईस्ट के बीच होने वाले तेल और गैस का अधिकांश ट्रांसपोर्टेशन इसी रास्ते से होता है.
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां से वापसी की राह मुश्किल नजर आ रही है. ईरान अब तेल और व्यापार के रास्ते को पूरी तरह से चोक करने की रणनीति पर काम कर रहा है. ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, एक सैन्य सूत्र ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के क्षेत्र या उसके द्वीपों पर हमला हुआ तो वह 'बाब अल-मंडेब' स्ट्रेट में एक नया मोर्चा खोल सकता है.
इस जानकारी ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. खासकर इसलिए क्योंकि यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है. इससे पहले से ही ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर चुका है, जहां से दुनिया का लगभग 20 फीसदी तेल और गैस आता है.
दरअसल, हाल ही में अमेरिका और इजरायल की तरफ से कई ऐसे बयान आए हैं जिनसे यह संकेत मिले हैं कि जंग में ईरान के द्वीपों को निशाना बनाया जा सकता है. फारस की खाड़ी में ईरान के करीब 30 से ज्यादा द्वीप हैं. इनमें से कई द्वीप रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं.
करीब 10 द्वीप ऐसे हैं जिनके सहारे ईरान तेल और गैस का निर्यात करता है, समुद्री सुरक्षा बनाए रखता है और होर्मुज पर नजर रखता है. यही कारण है कि ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर उसके द्वीपों को निशाना बनाया जाता है तो परिणाम और भी भीषण होंगे. ऐसे में बाब-अल-मंडेब को लेकर हालिया जानकारी ने दुनिया के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है.
क्या है बाब-अल-मंडेब और क्यों है इतना अहम?
अरबी भाषा में 'बाब अल-मंडेब' का मतलब होता है 'आंसुओं का द्वार'. यह संकरा समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. यह यमन (जहां ईरान समर्थित हूतियों का नियंत्रण है) और अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र (जिबूती और इरिट्रिया) के बीच स्थित है. अपने सबसे संकरे हिस्से में यह मात्र 29 किलोमीटर चौड़ा है.

इजरायल ने ईरान के इस्फहान स्थित नौसैनिक रिसर्च सेंटर पर हमला कर उसकी पनडुब्बी निर्माण क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. यह केंद्र नौसेना के लिए पनडुब्बियों और सिस्टम विकसित करने का प्रमुख ठिकाना था. इस कार्रवाई से ईरान की सैन्य क्षमता प्रभावित हुई है और क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है. दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन की ओर मिसाइल दागने का दावा किया है.

डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वे ईरान से बातचीत कर रहे हैं और होर्मुज स्ट्रेट की उसके साथ संयुक्त निगरानी करेंगे. एक महीने से ईरान पर कहर बरपा रहे ट्रंप पर किसी को विश्वास नहीं हो रहा है. दुनियाभर के मीडिया आउटलेट्स ये कयास लगा रहे हैं कि ट्रंप की तैयारी होर्मुज स्ट्रेट पर बड़े हमले की है. जहां ईरान ने नाकाबंदी की हुई है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान पर नया बयान देकर दुनिया को चौंका दिया है. ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है और वो समझौता करेंगे. साथ ही उन्होनें ये भी कहा कि ईरान ने अमेरिका को एक तोहफा दिया जो बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण है. ट्रंप ने आगे ये बाताया कि ये तोहपा तेल और गैस से जुड़ा है.










