
मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष... उत्तराखंड के ग्रामीण 12 साल बाद भी सड़क के इंतजार में
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उत्तराखंड के ग्रामीण सालों से सड़क की कमी के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी चीजों के लिए जूझ रहे हैं. लिवाड़ी–फिताड़ी सड़क अधूरी होने से स्थानीय लोगों की जिंदगी कठिनाई और जोखिम में है.
उत्तराखंड के देहरादून या अन्य बड़े शहरों के आसपास के क्षेत्रों में आप जाएंगे तो वहां आपको अच्छी और सुगम सड़कें देखने को मिल जाएंगी. लेकिन आज भी उत्तराखंड के कई ऐसे ग्रामीण इलाके हैं, जहां लोग सालों से सड़क का इंतजार कर रहे हैं.
ग्रामीणों के अनुसार, बीमारी में इलाज, बच्चों की शिक्षा और रोजगार के लिए उन्हें कई किलोमीटर पहाड़ पार करना पड़ता है. सड़कें केवल सुविधा का सवाल नहीं हैं, बल्कि इनकी कमी ग्रामीणों की जिंदगी और संघर्ष को और कठिन बना रही हैं. हाल ही में, झकझोर देने वाली घटना में एक गर्भवती महिला की सड़क न होने के कारण मौत हो गई.
मोरी ब्लॉक की अधूरी सड़क परियोजना
उत्तरकाशी के मोरी ब्लॉक की लिवाड़ी–फिताड़ी सड़क परियोजना वर्ष 2012 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत स्वीकृत हुई थी. यह सड़क कासला, रेक्चा, राला, फिताड़ी और लिवाड़ी गांवों के लिए जीवनरेखा साबित हो सकती थी. लेकिन 13 साल बाद भी पूरी नहीं हुई है.
एक ही ठेकेदार ने कई साल लटकाया काम

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