
मुझे बुर्के से असहजता नहीं, बल्कि शर्म आती है, बोले आरिफ मोहम्मद खान
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Agenda AajTak 2022: एजेंडा आजतक के महामंच पर केरल के राज्यपाल आऱिफ मोहम्मद खान ने कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा की. इस दौरान आऱिफ मोहम्मद ने बुर्के को लेकर कहा कि मैं इससे असहज नहीं होता, बल्कि शर्म आती है. सिर्फ अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए धर्म और संस्कृति को मत बांटिए.
Agenda AajTak 2022: एजेंडा आजतक के महामंच पर केरल के राज्यपाल आऱिफ मोहम्मद खान ने कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा की. इस दौरान आऱिफ मोहम्मद ने बुर्के को लेकर कहा कि मैं इससे असहज नहीं होता, बल्कि शर्म आती है. इस दौरान उन्होंने कहा कि दुनिया मान रही है कि हम ज्ञान का केंद्र थे, तो फिर हमारा इतना बुरा हाल क्यों हुआ. इसकी बड़ी वजह ये है कि हम अपनी विरासत और आदर्शों के प्रति वफादार नहीं रहे. उन्होंने कहा कि जो ज्ञान प्राप्त करते हैं, उसे दूसरों के साथ साझा करिए, लेकिन हमने ऐसा करना बंद कर दिया.
बहुत सारी मुस्लिम लड़कियां हैं, जिन्होंने कहा है कि हम बुर्का पहनना चाहते हैं, इस सवाल के जवाब में गवर्नर आरिफ मोहम्मद ने कहा कि उन्हें बुर्का पहनने से कौन रोक रहा है. ये देश आजाद है, लोकतांत्रिक है. जिस तरह हर व्यक्ति का अधिकार है कि वह क्या पहनेगा. ठीक उसी तरह से 12वीं कक्षा तक के स्कूल हैं, उनका अधिकार भी मानना होगा कि वह अपना ड्रेस कोड लागू कर सकें. दुनिया में हर जगह इसे स्वीकार किया जाता है.
हमारे यहां ऐसी शिक्षण संस्थाएं हैं, जो हिजाब पहनने को परमिशन देती हैं, अगर आपको यहां नहीं पढ़ना तो वहां चले जाइए. लेकिन जिस दिन आपने एडमिशन लिया, उस दिन वहां हिजाब पहनना अलाऊ नहीं थी, लेकिन आपने दाखिला लिया. बाद में आपने ये मुद्दा उठा दिया. ये तो नहीं चलता.
आरिफ मोहम्मद ने कहा कि सिर्फ अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए धर्म और संस्कृति को मत बांटिए. इस दौरान उन्होंने एक किस्सा सुनाया. कहा कि इंडोनेशिया में राष्ट्रपति भवन के बाहर कृष्ण अर्जुन संवाद लिखा हुआ है. हमारे एंबेसडर ने कहा कि इस बारे में किसी भी इंडोनेशियन से पूछिए कि ये क्या है, तो वह बता देंगे कि ये कृष्ण अर्जुन संवाद है. जब उनसे ये पूछा गया कि आप तो मुसलमान हैं. तो इंडोनेशियन ने कहा कि हां, ये सच है कि हम मुसलमान हैं. इस्लाम हमारा धर्म है, लेकिन ये हमारी संस्कृति है.
आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि कल्चर, रिलीजन और भाषा का इस्तेमाल बांटने के लिए किया जा रहा है. ये भारत की कल्पना नहीं है. भारत की राजनीति की कल्पना ये है कि हमारा विश्वास आदर्शों में होना चाहिए. जो पब्लिक लाइफ और पॉलिटिक्स में आए, उसे संपूर्ण ज्ञान होना चाहिए, संस्कार होना चाहिए. साथ ही ये भाव होना चाहिए कि वह सभी को एक नजर से देखे.
इस दौरान गवर्नर आरिफ मोहम्मद ने कहा कि केरल में पिछले तीन साल में 15 यूनिवर्सिटी में कई कॉन्वोकेशन अटेंड किए. इसमें एक भी दीक्षांत समारोह ऐसा नहीं है, जिसमें 70 फीसदी से कम लड़कियां गोल्ड मेडल और अवार्ड जीती हों. इन दीक्षांत समारोहों में लड़कियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है. इससे मुझे खुशी मिलती है. मैंने लड़कों से कहा कि अपना दिल छोटा मत करे, इन लड़कियों से सीखो.

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