
मुंबई की हवा पर इथियोपियाई ज्वालामुखी का असर? सैटेलाइट डेटा से खुली महाराष्ट्र सरकार की पोल
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महाराष्ट्र सरकार की वकील ज्योति चव्हाण ने अदालत में कहा था कि इथियोपिया के ज्वालामुखी विस्फोट के कारण मुंबई की वायु गुणवत्ता बिगड़ी है. लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था. अब सैटेलाइट डेटा विश्लेषण से भी इस दावे की पोल खुल गई है.
मुंबई की बिगड़ती हवा को इथियोपिया के ज्वालामुखी विस्फोट से जोड़ने वाले महाराष्ट्र सरकार के दावे पर सैटेलाइट डेटा ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. पिछले सोमवार को इथियोपिया में हुए दुर्लभ ज्वालामुखी विस्फोट के तुरंत बाद सरकार की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में यह दलील दी गई कि इसी कारण राज्य की वायु गुणवत्ता खराब हुई. लेकिन अदालत ने इसे मानने से इंकार कर दिया.
अब आजतक की OSINT के ओपन-सोर्स विश्लेषण ने भी सरकारी दावे को खारिज कर दिया है. सैटेलाइट डेटा विश्लेषण से पता चलता है कि ज्वालामुखी से निकला धुआं मुंबई के ऊपर से गुजरा ही नहीं. महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े भी दिखाते हैं कि इथियोपिया के विस्फोट का मुंबई की वायु गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. ज्वालामुखीय राख का रास्ता मुंबई से नहीं गुजरा, लेकिन अदालत में सरकार के तर्क को गलत साबित करने वाला यह अकेला कारण नहीं है.
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डेटा के अनुसार, मुंबई की हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) अधिक पाई गई है, जो उद्योग, वाहनों और दहन से निकलती है. जबकि इथियोपिया के ज्वालामुखी से निकली मुख्य गैस सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) है, जो भारत के आसमान में जरूर देखी गई, लेकिन मुंबई की हवा में इसका असर नहीं दिखा.

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