
मादुरो, सद्दाम, गद्दाफी... मूछों के ताव से चिढ़ता रहा अमेरिका, इन नेताओं से रही लंबी अदावत
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स्पैनिश भाषा में कड़क मूंछों को
कहा जाता है कि ये मूंछ की लड़ाई है. अमेरिका ने मूंछ का नाम तो नहीं लिया, लेकिन अमेरिकन डीप स्टेट कुछ राष्ट्राध्यक्षों का मूंछों का ताव बर्दाश्त नहीं कर पाया. कड़क मूंछों वाले कुछ ऐसे राष्ट्राध्यक्ष रहे जिनसे अमेरिका की कभी नहीं बनी. अमेरिका का इन राष्ट्राध्य्क्षों/तानाशाहों से कभी तेल को लेकर, कभी डेमोक्रेसी के नाम पर तो कभी हथियारों के नाम पर ठनी.
मनोविज्ञान कहता है मूंछें व्यक्तित्व का संकेत देती हैं. आक्रामकता और नेतृत्व का आभामंडल क्रिएट करती हैं. राजनीति में ये छवि गढ़ती हैं. मादुरो, सद्दाम हुसैन, रॉबर्ट मुगाबे, गद्दाफी जैसे नेताओं की मूंछें ठसक और बगावत का संकेत देती हैं. मूंछें न सिर्फ चेहरा, बल्कि शक्ति का दर्पण हैं.
यूं तो अमेरिकी साम्राज्यवाद और डीप स्टेट का जाल पूरी दुनिया में फैला है और अमेरिकी एजेंसियां इसका इस्तेमाल अपने जरूरतों के अनुसार करती है. लेकिन मादुरो, सद्दाम हुसैन, रॉबर्ट मुगाबे, गद्दाफी जैसे कुछ खास नेता रहे जो अपनी कार्यशैली के अलावा अपने मूंछों के लिए भी चर्चित रहे.
पिछले अमेरिका ने दशकों से संसाधनों और रणनीतिक हितों के नाम पर तानाशाहों को सत्ता से उखाड़ फेंका है, लेकिन असल में ये घटनाएं उसके वर्चस्व की भूख को दर्शाती हैं.
निकोलस मादुरो
स्पैनिश में शानदार या कड़क मूंछों को "Super Bigote" कहते हैं. यानी कि Super Mustache. वेनेजुएला में स्पेनिश बोली जाती है. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की मशहूर मूंछें एक खास राजनीतिक प्रतीक हैं और उनके कार्टून सुपरहीरो ऑल्टर ईगो, "सुपर बिगोटे की प्रेरणा भी हैं.

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