
महाराष्ट्र: जगह-जगह पोस्टर लगाकर अपने पार्षदों को क्यों ढूंढ रही उद्धव की शिवसेना?
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122 सदस्यीय कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में शिंदे गुट को 52 और बीजेपी को 51 सीटें मिली हैं, जबकि मेयर पद के लिए 62 का जादुई आंकड़ा जरूरी है.
महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव नतीजे के बाद भी प्रदेश में सियासी हलचल जारी है. इस बीच कल्याण-डोंबिवली में दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां शिवसेना (उद्धव गुट) अपने चार पार्षदों को अब तक नहीं ढूंढ पाई है. रिजल्ट के बाद से ये पार्षद गायब हैं और उनसे पार्टी का कोई संपर्क नहीं हो रहा है.
पार्टी ने शहर के अलग-अलग इलाकों में अपने चार पार्षदों (मधुर म्हात्रे, कीर्ति धोने, राहुल कोट और स्वप्नाली केने) के पोस्टर लगाए हैं. कल्याण-डोंबिवली नगर निगम चुनाव के नतीजे आने के बाद से ये चार नवनिर्वाचित पार्षद अपने आवास से लापता हैं. उनका फोन भी बंद है.
पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि मधुर म्हात्रे, कीर्ति धोने, राहुल कोट और स्वप्नाली केने अपने व्यवहार के लिए मतदाताओं को जवाब दें. कई प्रयासों के बावजूद इन पार्षदों के सटीक ठिकाने का पता नहीं चल पाया है, इसलिए पार्टी अब पोस्टर लगाकर इन पार्षदों को ढूंढ रही है. चर्चा है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना इन चार पार्षदों को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है.
122 सदस्यीय कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में शिंदे गुट को 52 और बीजेपी को 51 सीटें मिली हैं, जबकि मेयर पद के लिए 62 का जादुई आंकड़ा जरूरी है. शिवेसना (यूबीटी) को 11, एमएनस को 5, कांग्रेस को 2 और एनसीपी (एसपी) को एक सीट मिली थी. उद्धव गुट के 11 पार्षदों में से चार के लापता होने से पोचिंग की चर्चाएं तेज हैं.
गायब पार्षद और परिजनों के दावे कल्याण के खेडेगोलाली इलाके से उद्धव गुट के टिकट पर जीते मधुर म्हात्रे नतीजों के बाद से ही गायब हैं. उनके पिता उमेश म्हात्रे ने बताया कि उनका बेटा परिवार के संपर्क में है, लेकिन वह लोकेशन नहीं बता सकते. उन्होंने शिंदे गुट के साथ किसी भी गठबंधन से इनकार किया.
इसी तरह डोंबिवली की नवनिर्वाचित पार्षद कीर्ति ढोणे भी अपने घर पर नहीं हैं. स्थानीय निवासियों को भी उनकी जानकारी नहीं है. दो अन्य पार्षदों का भी कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है.

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