
मंदिर के नाम की संपत्ति के मालिक सिर्फ भगवान, पुजारी नहीं: Supreme Court
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि पुजारी केवल देवता की संपत्ति के मैनेजमेंट करने की एक गारंटी है और अगर पुजारी अपने काम करने में, जैसे प्रार्थना करने और जमीन का प्रबंधन करने संबंधी काम में नाकामयाब रहे तो इसे बदला भी जा सकता है.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंदिरों की संपत्ति को लेकर एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि मंदिर (Temple) के पुजारी को जमीन का मालिक नहीं माना जा सकता और देवता ही मंदिर से जुड़ी जमीन के मालिक (Bhumiswami) हैं. जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एएस बोपन्ना की एक बैंच ने कहा कि पुजारी केवल मंदिर की संपत्ति के मैनेजमेंट के मकसद से जमीन से जुड़े काम कर सकता है. सर्वोच्च अदातल ने सोमवार को कहा, ‘ऑनरशिप कॉलम (Ownership Column) में केवल देवता का नाम ही लिखा जाए, चूंकि देवता एक न्यायिक व्यक्ति होने के कारण जमीन का मालिक होता है. जमीन पर देवता का ही कब्जा होता है, जिसके काम देवता की ओर से सेवक या प्रबंधकों की ओर से किए जाते हैं. इसलिए, मैनेजर या पुजारी के नाम का जिक्र ऑनरशिप कॉलम में करने की जरूरत नहीं है.’
Rafale vs J-20 Mighty Dragon: राफेल और चीन के J-20 माइटी ड्रैगन के बीच तुलना में स्टील्थ बनाम सेंसर शक्ति की बहस तेज है. J-20 को रडार से बचने में बढ़त मिल सकती है, जबकि राफेल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सेंसर फ्यूजन में मजबूत है. आधुनिक हवाई युद्ध में नेटवर्क, मिसाइल रेंज और रणनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

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Vibhav Anti-Tank Mines: विभव माइन को खास तौर पर मोबिलिटी किल यानी दुश्मन टैंक को पूरी तरह नष्ट करने के लिए नहीं बनाया गया है. बल्कि उसकी गति रोकने के लिए डिजाइन किया गया है. यह टैंक के ट्रैक, सस्पेंशन या ड्राइव सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर उसे वहीं रोक देती है. इससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो जाता है. इससे आसान निशाना बन जाता है.

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