
‘भूखे सोने की नौबत है… जीने का हक तो दो’, कर्नाटक में बाइक टैक्सी बैन से जूझते ड्राइवरों का छलका दर्द
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कर्नाटक में बाइक टैक्सी सर्विस पर रोक लगाए जाने के बाद लाखों लोग जो इससे जुड़े थे उनके जीवन में भूचाल सा आ गया है. उनके आमदनी का स्रोत रुक गया. जिसकी वजह से वह अपना घर ठीक से नहीं चला पा रहे हैं. 8 जिलों से करीब 5000 ड्राइवर्स बेंगलुरु में एकत्रित हुए बैन के खिलाफ प्रदर्शन किया.
Karnataka bike taxi riders rally at Vidhan Soudha in Bengaluru: कर्नाटक के उच्च न्यायालय के एक फैसले की वजह से प्रदेश में बाइक टैक्सी पर रोक लग गई है. जिसकी वजह से लाखों लोगों की जिंदगी पटरी से उतर गई है. इस रोक के ख़िलाफ आज (शनिवार) को बेंगलुरु में ज़ोरदार प्रदर्शन हुआ.
प्रदेश के 8 जिलों से 5000 से ज्यादा बाइक ड्राइवरों (राइडर्स) एकत्रित हुए और बाइक टैक्सी पर लगे रोक को हटाने की मांग की. साथ ही ड्राइवरों ने सरकार से नई नीति बनाने का आग्रह किया.
ये ड्राइवर्स मैसूर, मंड्या, हसन, दावणगेरे, तुमकुरु, रामनगर, शिवमोग्गा और कनकपुरा से आए थे. आजतक संवाददाता सगाय राज ने इस पूरे प्रदर्शन को कवर किया और ड्राइवरों से बातचीत की है.
आजतक से बातचीत करते हुए टुमकुर के बाइक टैक्सी के चालक रमेश ने बताया कि बाइक सर्विस पर रोक लगने के बाद उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. पहले बाइक टैक्सी की वजह से वह अपना घर चला लेते थे. लेकिन अब आमदनी का कोई स्रोत नहीं है. बच्चों के स्कूल के फ़ीस भी बकाया हैं और खाने-पीने के भी लाले पड़ रहे हैं.
वहीं, मैसूर से आए एक बाइक टैक्सी चालक रवि ने बातचीत के दौरान बताया कि वह अपने पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते हैं. बाइक टैक्सी सर्विस पर बैन लगने की वजह से वह घर ठीक से नहीं चला पा रहे. बिजली बिल और किराया तक भरने में वह अब सक्षम नहीं हैं. उधार पर जिंदगी चल रही है. सर्विस पर बैन लगने की वजह से सिर्फ आमदानी नहीं, बल्कि इज़्ज़त को भी छीन लिया है.
मांड्या से बेंगलुरु प्रदर्शन में शामिल होने आईं प्रिया ने बातचीत करते हुए कहा कि हम नियम मानने के लिए तैयार हैं. लेकिन, जीने का हक तो रहने दो.

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