
भारत के दुश्मनों को चुन-चुन कर मार रहा है 'अनजान कातिल', अब PAK में भी महफूज नहीं आतंकी!
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इसी 8 सितंबर को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की एक मस्जिद में बेजान पड़े रियाज़ अहमद उर्फ अबू कासिम की डरावनी तस्वीर सामने आई थी. उसके चारों तरफ खून बिखरा हुआ था. जुमे की नमाज के दौरान उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
भारत के वो दुश्मन, जो कभी समझते थे कि वो सुरक्षित पनाहगाहों में हैं. उन्हें अब पता चल रहा है कि उनकी पनाहगाह भी महफूज़ नहीं है. क्योंकि पाकिस्तान के आतंक का ठिकाना अब अंदरुनी तौर पर ढह गया है. इंडिया टुडे की ये विशेष रिपोर्ट उस खुफिया दुनिया की पड़ताल करती है, जहां आतंक ने जड़ें जमा ली हैं.
असल में आतंकियों ने जिस जगह को अपनी पनाहगाह बना लिया था, उसे अब पतन का सामना करना पड़ रहा है. ये रिपोर्ट आतंक की दुनिया से जुड़े लोगों के पतन का खुलासा करती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि पाकिस्तान के सरबरा अब सत्ता संघर्ष में फंस गए हैं, जिसकी वजह से सारा इल्जाम वक्त और हालात पर लगाया जा रहा है.
पीओके में गोली मारकर हत्या इस आतंकी दुनिया के बेपर्दा होने की शुरुआत 8 सितंबर को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की एक मस्जिद में बेजान पड़े रियाज़ अहमद उर्फ अबू कासिम की डरावनी तस्वीर से होती है. उसके चारों तरफ खून बिखरा हुआ था, जो जुमे की नमाज के दौरान उसकी खात्मे की कहानी बयां कर रहा था. पीओके के रावलकोट में अज्ञात हमलावरों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी.
मोस्ट वॉन्टेड लश्कर आतंकवादियों में से एक रियाज़ उर्फ अबू कासिम 1999 में सरहद पार कर पाकिस्तान में घुस गया था. इसके बाद उसने भारत में कई आतंकवादी हमलों को अंजाम दिया था. जिसमें पिछले जनवरी में राजौरी जिले का भयानक ढांगरी आतंकी हमला भी शामिल था.
जैश और हिज्बुल से हिसाब IC-814 विमान के अपहरण से लेकर संसद पर हमले तक, पठानकोट एयरबेस हमले से पुलवामा की बमबारी तक.. एक नाम लगातार उभरता है और वो नाम है पाकिस्तान में मौजूद नामित आतंकवादी मौलाना मसूद अज़हर का. जो आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक भी है. फरवरी 2019 में जब भारतीय युद्धक विमानों ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर हमला किया था, तब फरार मसूद अज़हर को पेशावर के एक मदरसे में पनाह मिली थी. हालांकि, ठीक दो महीने बाद एक विस्फोट से उस इलाके की ज़मीन हिल गई थी, जहां मसूद अज़हर ने पनाह ले रखी थी और वह बाल-बाल बच गया था. तब से आतंक का आका मसूद अजहर लोगों की नज़रों से लापता है.
अलग-अलग घटनाएं या कोई बड़ा पैटर्न? हिज्ब-उल-मुजाहिदीन आतंकी संगठन के कमांडर बशीर अहमद पीर का भी दुखद अंत हुआ. वो जम्मू-कश्मीर में हथियारबंद आतंकवादियों की भर्ती करने और घुसपैठ कराने के लिए जिम्मेदार था. पीर ने अपने बॉस सैयद सलाहुद्दीन के साथ पाकिस्तानी सरकार के संरक्षण में वर्षों तक काम किया. लेकिन इस साल की शुरुआत में उसे बिल्कुल नजदीक से गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई. अब सवाल यह है कि क्या ये मामले अलग-अलग घटनाएं हैं या किसी बड़े पैटर्न का हिस्सा हैं?

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