
भगवान शिव शरीर पर क्यों लगाते हैं भस्म? ये है इसके पीछे का विशेष कारण
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सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष महिमा है. साथ ही, भगवान सावन की शिवरात्रि पर भी भोलेनाथ की विशेष पूजा की जाती है. शास्त्रों में शिवजी के स्वरूप के संबंध कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं. जैसे, शिवजी की पूजा में भस्म का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है. लेकिन क्यों, भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म धारण करते हैं.
Sawan Shivratri 2023: शिवरात्रि भगवान शिव के सबसे प्रिय पर्वों में से एक माना जाता है और सावन में आने वाली शिवरात्रि बेहद खास मानी जाती है. शिवरात्रि वाले दिन सभी भक्त शिवलिंग पर राख, बेलपत्र और भांग अर्पित करते हैं. भगवान शिव को जो बात सबसे अलग करती है वह यह है कि उन्हें दैवीय आभूषण और वस्त्र नहीं बल्कि राख यानी 'भस्म' पसंद है. भगवान शिव अपने शरीर पर केवल भस्म लगाते हैं और भस्म ही उनका आभूषण है. लेकिन, भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म क्यों लगाते हैं. आइए जानते हैं इसका कारण.
भगवान शिव के शरीर पर भस्न लगाने का कारण
भगवान शिव अपने पूरे शरीर पर भस्म लगाकर रखते हैं. इसलिए, शिवजी के भक्त उस राख का प्रयोग तिलक के रूप में करते हैं. शिव पुराण में इस बात का जिक्र है कि भगवान शिव शरीर पर राख का प्रयोग क्यों करते हैं.
एक कथा प्रचलित है कि जब सति ने क्रोध में आकर खुद को अग्नि के हवाले कर दिया था, उस वक्त महादेव उनका शव लेकर धरती से आकाश तक हर जगह घूमे थे. विष्णु जी से उनकी यह दशा देखी नहीं गई और उन्होंने माता सति के शव को छूकर भस्म में तब्दील कर दिया. अपने हाथों में भस्म देखकर शिव जी और परेशान हो गए और सति की याद में वो राख अपने शरीर पर लगा ली.
धार्मिक ग्रंथों में यह भी कहा गया है कि भगवान शिव कैलाश पर्वत पर वास करते थे. वहां बहुत ठंड होती थी. ऐसे में खुद को सर्दी से बचाने के लिए वह शरीर पर भस्म लगाते थे. आज भी बेल, मदार के फूल और दूध चढ़ाने के अलावा लगभग हर शिव मंदिर में भस्म आरती होती है.
दूसरी कथा

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