
ब्रिटेन में एयर ट्रैफिक कंट्रोल में गड़बड़ी, 100 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल... हजारों यात्री परेशान
AajTak
दक्षिण इंग्लैंड स्थित नेशनल एयर ट्रैफिक सर्विस (NATS) के सेंटर में तकनीकी गड़बड़ी के चलते हीथ्रो, गैटविक, बर्मिंघम, मैनचेस्टर, कार्डिफ और एडिनबरा जैसे प्रमुख एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट्स को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा.
ब्रिटेन में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में आई तकनीकी खराबी के कारण 100 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल की गई हैं साथ ही कई फ्लाइट्स में देरी हुई. जिससे हजारों यात्री देशभर के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर फंसे रह गए.
दक्षिण इंग्लैंड स्थित नेशनल एयर ट्रैफिक सर्विस (NATS) के सेंटर में तकनीकी गड़बड़ी के चलते हीथ्रो, गैटविक, बर्मिंघम, मैनचेस्टर, कार्डिफ और एडिनबरा जैसे प्रमुख एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट्स को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा.
हालांकि NATS का कहना है कि यह तकनीकी समस्या सिर्फ 20 मिनट में ठीक कर ली गई, लेकिन इस दौरान पैदा हुई अव्यवस्था ने पूरे दिन का संचालन प्रभावित कर दिया है. दोपहर और शाम तक देशभर से कई यात्रियों ने उड़ानों के रद्द होने या देरी की शिकायतें कीं.
इस गड़बड़ी के कारण कई यात्रियों की छुट्टियां, ट्रांजिट योजनाएं और व्यवसायिक मीटिंग्स प्रभावित हुईं. एयरलाइनों और हवाईअड्डों को स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़े.
एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम की इस विफलता ने एक बार फिर हवाई यात्रा में तकनीकी सुरक्षा और बैकअप सिस्टम की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

इजरायल की Haifa Refinery पर हुए ईरानी हमले में अहम बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है. हमला रिफाइनरी से जुड़े एक थर्ड-पार्टी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुआ, जो ऑपरेशन के लिए जरूरी था. कंपनी के मुताबिक, कुछ दिनों में फिर से पूरी तरह संचालन शुरू होने की उम्मीद है. ज्यादातर प्रोडक्शन यूनिट्स फिलहाल चालू हैं. देखें वीडियो.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही मीडिया के सामने सेना भेजने की बात से इनकार किया हो, लेकिन 2,200 मरीन सैनिकों के साथ यूएसएस त्रिपोली युद्धपोत का मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ना कुछ और ही इशारा कर रहा है. ट्रंप का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तेल मार्ग को ईरान के कब्जे से छुड़ाना और वहां दबे यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना है. अगर ये सेना तैनात होती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य कदम होगा.

महायुद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है...लेकिन बम-बारूद-गोले थम ही नहीं रहे ..। कहां तो युद्ध ईरान को न्यूक्लियर पावर बनने से रोकने के लिए शुरू हुआ...और कहां ये जंग तेल युद्ध बनकर दुनिया को धधका रहा है...। समझ नहीं आ रहा कि ये जंग किसे धुरंधर बना रहा...एक तरफ तबाही है...तो दूसरी तरफ तेल-गैस-हीलियम संकट...जो हर घर...हर परिवार पर असर डाल रहा है..

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध में अब तेल-गैस के ठिकानों पर हमले से तनाव बढ़ गया है. पूरे दुनिया पर ऊर्जा का संकट बढ़ता जा रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल के बाजार में पहले ही उथल-पुथल मची है. अब दोनों ओर से ताजा हमलों से पूरी दुनिया महंगाई के बड़े संकट की ओर बढ़ती जा रही है. देखें लंच ब्रेक.

चाहे हालात शांति के हों या युद्ध जैसे तनावपूर्ण, जिंदगी कभी नहीं रुकती, इसकी मिसाल लेबनान में देखने को मिली. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच यहां दुनिया के अलग-अलग देशों से आए हजारों लोग, जो काम के सिलसिले में लेबनान में रह रहे हैं, उन्होंने इजरायली हमलों और तमाम चुनौतियों के बावजूद ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया. संघर्ष और अनिश्चितता के बीच भी लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं.

होर्मुज को लेकर तनातनी जारी है. इस बीच छह देशों ने एक बयान जारी किया है ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड्स ने कहा है कि वे हॉर्मुज़ में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं. हालांकि, इटली, जर्मनी और फ्रांस ने बाद में स्पष्ट किया कि वे तत्काल किसी सैन्य सहायता की बात नहीं कर रहे हैं. इन देशों ने क्या शर्त रखी है. जानें.







