
बाइक पर बदमाश, फायरिंग और पैर में गोली... हैरान कर देगी यूपी पुलिस के इस नकली एनकाउंटर की असली कहानी
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अफसोस की बात ये है कि अपने शानदार प्रदर्शन के बावजूद यूपी पुलिस के एक भी जवान या अफसर को ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए पेरिस जाने का मौका नहीं मिला. यकीन मानिए भारतीय ओलंपिक संघ यूपी पुलिस के कुछ निशानेबाज़ों को अपने दल में शामिल कर लेता, तो पक्का कुछ और मेडल तो तय ही थे. कोई हैरत नहीं होती अगर गोल्ड ही झोली में आ गिरता.
26 जुलाई से पेरिस में ओलंपिक शुरू होने जा रहा है. इस बार भारतीय खिलाड़ियों से कहीं ज्यादा पदक जीतने की उम्मीद है. खास तौर पर अपने शूटरों से. भारतीय शूटिंग टीम में इस बार कुल 21 निशानेबाज़ हैं. लेकिन अफसोस की बात ये है कि अपने शानदार प्रदर्शन के बावजूद यूपी पुलिस के एक भी जवान या अफसर को ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए पेरिस जाने का मौका नहीं मिला. यकीन मानिए भारतीय ओलंपिक संघ यूपी पुलिस के कुछ निशानेबाज़ों को अपने दल में शामिल कर लेता, तो पक्का कुछ और मेडल तो तय ही थे. कोई हैरत नहीं होती अगर गोल्ड ही झोली में आ गिरता.
मज़ाक से भी इसे मज़ाक में मत लीजिएगा. जो कह रहे हैं, बिल्कुल सच कह रहे हैं. रात का घुप्प अंधेरा हो, या कोई आड़े-तिरछे दौड़ता हुआ भाग रहा हो, कोई मोटरसाइकिल पर हो, या गाड़ी में, कोई खड़ा हो, बैठा हो, लेटा हो, जिस हाल में हो और कितनी ही दूरी पर या नज़दीक हो, मजाल क्या कि जो निशाना चूक जाए? गोली पैर पर ही लगेगी. और वो भी पैर के एक खास हिस्से पर. आपको सच ना लग रहा हो, इसीलिए इस घटना को जान लेते हैं.
थानेदार ने सुनाई एनकाउंटर की कहानी चलिए बात करते हैं अमरोहा की. अमरोहा के हसनपुर थाने एक इंस्पेक्टर साहब तैनात हैं. नाम दीप कुमार पंत है. ये अभी-अभी ताजा-ताजा हुए एक एनकाउंटर की कहानी सुना रहे हैं. दावा है एक सांस में इतनी सच्ची कहानी शायद ही किसी और पुलिस वाले ने सुनाई हो. क्या मजाल जो इंस्पेक्टर साहब बीच में कहीं कॉमा या फुलस्टॉप लगा देते. पूरे एक मिनट नौ सेकंड तक एक ही सांस में सबकुछ बयान कर दिया.
पुलिस की कहानी में 3 किरदार इनकी कहानी में तीन किरदार थे. मोटरसाइकिल पर बैठे वही तीन लड़के. तीन संदिग्ध लड़के. जिन्होंने पुलिस के रोकने पर पुलिस पर गोली चला दी और फिर जवाबी फायरिंग में तीन में से एक अपने पैर पर गोली खा बैठा. पैर में गोली खाने वाला ये वही मनोज सैनी है. जबकि उसके पीछे मोटरसाइकिल पर जो दो और संदिग्ध लड़के बैठे थे, ये वही दोनों हैं. जिनमें से एक का नाम रोहित है और दूसरे का अमित.
घायल बदमाश के भाई ने बताया सच अब इंस्पेक्टर साहब के एनकाउंटर की कहानी को आगे बढ़ायें, उससे पहले ये जरूरी होगा कि रोहित और अमित भी अपनी कहानी सुना दें. साथ ही जिस मनोज को गोली लगी है, उसके भाई ने भी उसकी तरफ से उसकी कहानी बयां की. जल्दी-जल्दी उस भाई की बात सुन लें, जिसके पैर में गोली लगी है. उसने बताया- रात को सो रहा था, पुलिस ले गई. रात को सो रहा था, पुलिस बाग में ले गई फोटो खिंचवाया, ले आई. कहानी बस यही है.
अदालत पहुंचा मामला अब कहानी यूं आगे बढ़ती है कि इंस्पेक्टर साहब मुठभेड़ के बाद तीनों को अदालत में पेश करते हैं. चूंकि उनकी कहानी के मुताबिक तीनों ने पुलिस पर गोली चलाई थी, लिहाज़ा बाकी मामलों के साथ-साथ इन तीनों पर हत्या की कोशिश की धारा भी लगा दी जाती है. अब जैसे ही ये मामला अदालत में शुरू होता है, जज साहब को भी ओलंपिक की शूटिंग याद आ जाती है. रात के घुप्प अंधेरे में पुलिस वालों का ये निशाना देख जज साहब दंग रह जाते हैं.

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