
बाइक किसकी, RDX कहां से आया... जांच में कोर्ट को मिलीं वो 5 खामियां जिससे बरी हुए मालेगांव ब्लास्ट के आरोपी
AajTak
मालेगांव धमाके में इस्तेमाल दोपहिया वाहन पर बम लगाए जाने का आरोप था. ATS ने दावा किया था कि वह स्कूटर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का था, लेकिन कोर्ट ने कहा कि उस वाहन का चेसिस और इंजन नंबर पूरी तरह स्पष्ट नहीं थे. कोर्ट ने पूरी जांच में इस तरह की कई खामियां पाईं.
महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को हुए बम धमाकों में 6 लोगों की मौत के लगभग 17 साल बाद मुंबई की एक विशेष अदालत ने गुरुवार को बीजेपी की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सभी सात आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि उनके खिलाफ ‘कोई विश्वसनीय और ठोस सबूत नहीं हैं.’
विशेष NIA अदालत ने अभियोजन पक्ष के दावों में कई बड़ी खामियां पाईं, जिसके चलते सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया गया. कोर्ट ने जांच एजेंसियों (ATS और NIA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
फैसले के बाद, प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित और अन्य पांच आरोपियों ने विशेष एनआईए न्यायाधीश ए.के. लाहोटी और अपने वकीलों का आभार व्यक्त किया. वहीं इस पूरे मामले में कोर्ट ने ATS/NIA जांच में 5 प्रमुख खामियां पाईं जो इस प्रकार है:
1. दोपहिया वाहन और बम पर सवालिया निशान: ATS ने दावा किया था कि जिस दोपहिया वाहन (मोटरसाइकिल) पर बम बांधा गया था, वह साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की थी. हालांकि, अदालत ने पाया कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसके चेसिस व इंजन नंबर पूरी तरह स्पष्ट नहीं थे. जिससे उसकी निर्णायक पहचान संभव नहीं थी. विशेष न्यायाधीश ए.के. लाहोटी ने स्पष्ट किया, "इस मामले में, नंबर अधूरे थे. इस आधार पर निश्चितता स्थापित करना विश्वसनीय साक्ष्य के बिना संभव नहीं है."
कोर्ट ने यह भी पाया कि साध्वी प्रज्ञा घटना से दो साल पहले ही 'संन्यासी' बन चुकी थीं. न्यायाधीश ने कहा कि यह दिखाने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर वाहन की मालिक थीं या उनके पास वह तत्काल कब्जे में था.
यह भी पढ़ें: मालेगांव 2008 ब्लास्ट केस: NIA कोर्ट ने कहा– सबूतों में खामियां, कई आरोप साबित नहीं हुए

हरियाणा के दादरी जिले में एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें बीजेपी विधायक को चमचों से दूर रहने की कड़वी नसीहत एक बुजुर्ग ने दी है. यह घटना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. वीडियो में बुजुर्ग की बातों का अंदाज़ साफ दिखता है जो नेताओं के व्यवहार पर सवाल उठाता है. यह घटना लोकतंत्र के अंतर्गत नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधे संवाद की महत्ता को दर्शाती है. ऐसे संवाद समाज में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ाने में मदद करते हैं.

दिल्ली के शास्त्री पार्क इलाके से एक दुखद और गंभीर खबर आई है जहां एक 11 साल के बच्चे की हत्या हुई है. बच्चे की आंख और सिर पर गंभीर चोट के निशान पाए गए हैं. जानकारी के अनुसार, पिता ने ही अपने पुत्र की हत्या की है और उसने घटना के बाद एक वीडियो बनाकर अपने परिवार को भेजा. इस घटना के बाद आरोपी फरार है और इस मामले की जांच जारी है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के PRO ने दावा करते हुए कहा कि प्रयागराज प्रशासन के बड़े अधिकारी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से सम्मान पूर्वक दोबारा स्नान कराने की कोशिश की है. जिसके बाद स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद की तरफ से प्रशासन के लिखित में माफी मांगने, मारपीट करने वालो पर कार्रवाई और चारों शंकराचार्य के स्नान की मांग की गई.










