
बांग्लादेश: दिग्गज महिला पत्रकार को कट्टरपंथियों ने घेरा, इंडियन एजेंट बताकर टूट पड़े, बुलानी पड़ी पुलिस
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बांग्लादेश में हसीना सरकार के पतन के बाद भीड़ द्वारा पत्रकारों को निशाना बनाए जाने के कई मामले सामने आ चुके हैं. दर्जनों पत्रकारों को आलोचनाओं, पक्षपात के आरोपों और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा है. नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने कई पत्रकारों की मान्यता रद्द कर दी है, और कई पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है.
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक महिला पत्रकार को भीड़ ने घेर लिया और कुछ देर तक बंधक बनाकर रखा. पुलिस ने उसे भीड़ के बीच से बचाया. यह घटना शनिवार को कवारन बाजार इलाके में उस समय घटी, जब टीवी की प्रतिष्ठित हस्ती मुन्नी साहा एक मीडिया कंपनी के ऑफिस से निकल रही थीं. भीड़ ने मुन्नी साहा पर भारतीय एजेंट और अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना का समर्थक होने का आरोप लगाया.
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पत्रकार मुन्नी साहा की कार को भीड़ ने रोक लिया था और उनके साथ दुर्व्यवहार किया, जिसके बाद ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. साहा पुलिस की गाड़ी में बैठकर वहां से निकलीं, जबकि भीड़ उनके खिलाफ नारे लगाती रही. साहा को पहले तेजगांव पुलिस स्टेशन ले जाया गया और यहां से ढाका मेट्रोपॉलिटन डिटेक्टिव ब्रांच कार्यालय में लाया गया. इससे ऑनलाइन अटकलों को बल मिला कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है.
हालांकि, पुलिस ने बाद में स्पष्ट किया कि वरिष्ठ पत्रकार मुन्नी साहा को हिरासत में नहीं लिया गया था, और रविवार सुबह रिहा कर दिया गया. साहा ने बताया कि भीड़ ने उन्हें जब घेर रखा था, तो उन्हें पैनिक अटैक आया और वह बीमार पड़ गई थीं. एक पुलिस अधिकारी ने बांग्लादेशी समाचार आउटलेट डेली ऑब्जर्वर को बताया, 'पुलिस ने मुन्नी साहा को हिरासत में नहीं लिया. कवारन बाजार में लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया था. तेजगांव पुलिस उन्हें सुरक्षा कारणों से डिटेक्टिव ब्रांच कार्यालय ले गई थी.'
अधिकारी ने कहा कि मुन्नी साहा चार मामलों में आरोपी हैं. उन्हें जमानत लेने और भविष्य के पुलिस समन का पालन करने के लिए अदालत में पेश होना होगा. पत्रकार साहा को परेशान करने वाली भीड़ के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में पुलिस की ओर से कोई बयान नहीं आया है. बता दें कि बांग्लादेश में हसीना सरकार के पतन के बाद भीड़ द्वारा पत्रकारों को निशाना बनाए जाने के कई मामले सामने आ चुके हैं.
दर्जनों पत्रकारों को आलोचनाओं, पक्षपात के आरोपों और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा है. नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने कई पत्रकारों की मान्यता रद्द कर दी है, और कई पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. हाल के दिनों में प्रोथोम अलो (Prothom Alo) और डेली स्टार (Daily Star) जैसे प्रमुख समाचार पत्रों के कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन देखा गया है.

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