
'बस जेल भेजना चाहते थे', राजपाल यादव का ऐलान, पब्लिक करेंगे अता पता लापता फिल्म, बोले- सच सामने...
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राजपाल यादव की डेब्यू प्रोडक्शन फिल्म अता पता लापता के चेक बाउंस विवाद में उन्होंने धोखाधड़ी के आरोपों को नकारा है. 2012 के इस मामले में राजपाल ने बताया कि निवेशक की गलत मंशा से विवाद बढ़ा. फिल्म की रिलीज पर हाईकोर्ट ने स्टे ऑर्डर दिया था, जिससे थिएटर रिलीज प्रभावित हुई.
राजपाल यादव अपनी डेब्यू प्रोडक्शन फिल्म अता पता लापता की वजह से जेल गए. अब उन्होंने इसे लेकर एक बड़ा ऐलान कर डाला है. उन्होंने लंबे समय से चल रहे चेक बाउंस केस पर खुलकर बात की. राजपाल ने खुद फरवरी में तिहाड़ जेल में सरेंडर किया था. मामला 2012 का है, जब उन्होंने इस फिल्म के लिए प्रोड्यूसर माधव गोपाल से 5 करोड़ रुपये लिए थे.
राजपाल ने धोखाधड़ी के आरोपों को नकारा
स्क्रीन से बातचीत और मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजपाल ने साफ कहा कि ये मामला धोखाधड़ी या कर्ज न चुकाने का नहीं है. उनका कहना है कि निवेशक की गलत मंशा की वजह से मामला बिगड़ा. राजपाल के मुताबिक, माधव गोपाल बार-बार एग्रीमेंट में बदलाव करते रहे और उन्होंने हर बार मान भी लिया. लेकिन फिल्म रिलीज से ठीक पहले हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर ले लिया, जिससे उनकी पहली फिल्म बुरी तरह फंस गई.
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
राजपाल ने बताया कि इसकी शुरुआत 2005 में हुई थी, जब उनके दोस्त मिथिलेश कुमार एक फिल्म आइडिया में पैसा लगाना चाहते थे. 2008 की आर्थिक मंदी और एक्टर्स की हड़ताल के बाद उनके कई प्रोजेक्ट रुक गए. तब उन्होंने थिएटर आर्टिस्ट्स के साथ ‘अता पता लापता’ बनाने का फैसला किया.
उन्होंने कहा- 2010 में जब मैं गांव गया था, तब मिथिलेश ने मेरी और माधव गोपाल जी की मुलाकात करवाई. मैंने उन्हें मुंबई आकर फिल्म देखने को कहा. उन्होंने करीब 70% फिल्म देखी और उसी शाम 5 करोड़ रुपये लगाने की बात कही.

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