
फिल्म के सेट पर मिले थे सलीम खान-जावेद अख्तर, बॉलीवुड में दीं हिट फिल्में, फिर क्यों हो गए थे अलग?
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इंडस्ट्री में जावेद अख्तर के शुरुआती साल गरीबी और अस्वीकृति से भरे हुए थे. उनकी पहली प्रोफेशनल जॉब सिर्फ 50 रुपये की थी. इसके बाद उन्होंने फिल्म 'सरहदी लुटेरा' में काम किया, जिसके लिए उन्हें 100 रुपये मिलते थे. यह फिल्म उनके लिए जीवन बदलने वाली साबित हुई, क्योंकि इसी के दौरान उनकी मुलाकात सलीम खान से हुई थी.
बॉलीवुड के कई आइकॉनिक डायलॉग्स और यादगार किरदारों के पीछे दो ऐसे लोग रहे हैं, जो एक वक्त पर साथ खाना खाते और उधार की छत पर गुजारा करते थे. ये दोनों और कोई नहीं, बल्कि सलीम खान और जावेद अख्तर थे. लीजेंड जोड़ी 'सलीम-जावेद' बनने से पहले मुंबई की कटथ्रोट फिल्म इंडस्ट्री में दोनों स्ट्रगलिंग आर्टिस्ट थे. दोनों की मुलाकात एक फिल्म के दौरान हुई थी और फिर जो वक्त और किस्मत को मंजूर था, दोनों के साथ वो हुआ.
इंडस्ट्री में जावेद अख्तर के शुरुआती साल गरीबी और अस्वीकृति से भरे हुए थे. उनकी पहली प्रोफेशनल जॉब सिर्फ 50 रुपये की थी. इसके बाद उन्होंने फिल्म 'सरहदी लुटेरा' में काम किया, जिसके लिए उन्हें 100 रुपये मिलते थे. यह फिल्म उनके लिए जीवन बदलने वाली साबित हुई, क्योंकि इसी के दौरान उनकी मुलाकात सलीम खान से हुई थी. एंग्री यंग मेन डॉक्यू-सीरीज के दौरान जावेद ने उन शुरुआती दिनों को याद किया था. लिरिसिस्ट ने बताया था, 'हमने कभी यह फैसला नहीं किया कि अब हम साथ काम करेंगे. हमने कभी सोच-समझकर साथ काम करने का फैसला नहीं किया. यह बस हो गया.'
कैसे हुई थी सलीम और जावेद की दोस्ती
'सरहदी लुटेरा' फिल्म के दौरान जावेद को डायरेक्टर और प्रोड्यूसर से लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा था. वो सलीम ही थे जिन्होंने उनका साथ दिया और उन्हें लिखते रहने के लिए प्रोत्साहित किया. जावेद को याद है कि कैसे सलिम ने उन्हें आश्वासन दिया था कि अगर वे इतनी मुश्किल परिस्थितियों में भी अच्छा परफॉर्म कर सकते हैं, तो बेहतर प्रोजेक्ट्स में वे शानदार काम कर सकते हैं. बांद्रा शिफ्ट होने के बाद जावेद एक दोस्त के साथ रहने लगे, जो किराया भरता था, जबकि वे काम ढूंढने पर फोकस करते थे. वे ज्यादा समय सलीम के घर पर बिताने लगे, जहां कम से कम एक समय का खाना तो मिल ही जाता था. वहां दोनों घंटों बैठकर कहानियों पर चर्चा करते और आइडियाज विकसित करते थे.
सलीम-जावेद की जोड़ी का पहला बड़ा मौका तब आया, जब फिल्ममेकर एसएम सागर ने उन्हें स्क्रीनप्ले ऑफर किया और फीस के बारे में पूछा. जावेद ने याद किया, 'उन्होंने कहा कि वे हमें इसके लिए 5000 रुपये देंगे. यह सुनकर मेरा दिल धड़क गया.' उन्होंने ऑफर स्वीकार किया और घोस्ट राइटर्स के रूप में असाइनमेंट पूरा किया, जिसने उनकी पार्टनरशिप की नींव रखी. जल्द ही काम कम होने पर उन्होंने सिप्पी फिल्म्स जाने का फैसला किया. वहां उन्होंने राजेश खन्ना से मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें 'हाथी मेरे साथी' फिल्म ऑफर की. इस प्रोजेक्ट ने उन्हें प्रोफेशनल राइटिंग ड्यूओ के रूप में स्थापित किया.
सलीम-जावेद का राइज

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