
फडणवीस-बोम्मई के बीच वाकयुद्ध के बाद, उद्धव ठाकरे ने सीमा विवाद पर कर्नाटक सीएम पर निशाना साधा
The Wire
कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद फिर से भड़का उठा है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने दावा किया था कि महाराष्ट्र के सांगली ज़िले के कुछ कन्नड़ भाषी ग्राम पंचायतों ने एक प्रस्ताव पारित कर कर्नाटक में विलय की मांग की थी. इसके बाद महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कर्नाटक के मराठी भाषी गांवों को महाराष्ट्र में शामिल करने के लिए संघर्ष करने की बात कही थी. दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है.
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार कर रही है, जिसके बाद महाराष्ट्र के कई राजनेताओं ने इसका विरोध जताते हुए बयान जारी किए हैं. महाराष्ट्रातील एकही गाव कर्नाटकात जाणार नाही !बेळगाव-कारवार-निपाणीसह मराठी भाषिकांची गावे मिळविण्यासाठी राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालयात भक्कमपणे लढा देईल !#Maharashtra pic.twitter.com/0sB1IIpIQA Not a single Maharashtra village will go to Karnataka. The state government will take the fight to get Marathi-speaking villages including Belgaum-Karwar-Nipani too to our state: Mahrashtra Dy CM Devendra Fadnavis pic.twitter.com/jADPiA5NaL
बोम्मई की टिप्पणी की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी राकांपा के नेता और महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता अजीत पवार की निंदा की है. उन्होंने मामले में केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की मांग की और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बोम्मई को एक ‘मजबूत जवाब’ देने की अपील की है. — Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) November 23, 2022 — ANI (@ANI) November 23, 2022
इस साल की शुरुआत में शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट के भारतीय जनता पार्टी भाजपा से हाथ मिलाने के बाद,दोनों राज्यों में भाजपा का शासन है. इस सीमा विवाद ने स्पष्ट रूप से पार्टी के भीतर एक संघर्ष को जन्म दे दिया है.
इस बीच महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार (23 नवंबर) को कहा था कि हाल में महाराष्ट्र के किसी भी गांव ने कर्नाटक में विलय की मांग नहीं की है और किसी सीमावर्ती गांव के ‘कहीं जाने’ का सवाल ही नहीं उठता.

एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करने वाले फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से उड़ानों में कम से कम 60% सीटों के चयन के लिए कोई शुल्क न लेने के फैसले को वापस लेने का आग्रह किया है. समूह का कहना है कि इस कदम से एयलाइंस को हवाई किराए बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा.

आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर की मां ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पनिहाटी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने पर सहमति दे दी है. प्रदेश भाजपा की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है, जिसमें इस सीट पर कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है.

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में 2017 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक की ख़तरनाक सफाई के दौरान 622 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है. 539 परिवारों को पूरा मुआवज़ा दिया गया, जबकि 25 परिवारों को आंशिक मुआवज़ा मिला. मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश 86 के साथ सबसे ऊपर है, इसके बाद महाराष्ट्र (82), तमिलनाडु (77), हरियाणा (76), गुजरात (73) और दिल्ली (62) का स्थान है.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक 'संदिग्ध आरोपी' होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते. दीपक ने बीते महीने कोटद्वार में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की जा रही बदसलूकी का विरोध किया था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.




