
प्रवासी बिहारियों के वोट किस गठबंधन के लिए गेमचेंजर साबित होंगे? सबकी अपनी-अपनी रणनीति
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बिहार विधानसभा चुनावों में जीत का परचम लहराने में इस बार प्रवासी बिहारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होने वाली है. जिस तरह कांटे का संघर्ष दिख रहा बिहार में दिख रहा है उसमें एक एक वोट बहुत कीमती हो जाता है. आइये देखते हैं कि प्रवासी वोटर्स को रिझाने में कौन पार्टी क्या कर रही है?
बिहार में प्रवासी वोटर्स की भूमिका बहुत बड़ी है. एक अनुमान के मुताबिक करीब 30 से 32 लाख प्रवासी बिहारी वोट हर विधानसभा चुनावों में वोट डालने आते हैं. इन्हें लाने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर पार्टियां तैयारी करती हैं. क्योंकि ये एक तरह से ठोस वोट होते हैं. जो शख्स कई सौ किलोमीटर की यात्रा करके जिस पार्टी के खर्चे पर जाता है अमूमन उसे ही वोट करता है. पार्टियां न केवल उनके टिकट की व्यवस्था करती हैं बल्कि उनके नुकसान की भरपाई भी करती हैं. जाहिर है कि इतना होने के बाद किसी का भी वोट पक्का हो जाता है कि उसका वोट किसे जाना है. इस बार भी प्रवासी वोटर्स को लाने के जबरदस्त तैयारी हो रही है.
पर छठ त्योहार के बाद वोट देने के लिए 10 दिन से 15 दिन रुकना पड़ सकता है. जिसके चलते यह कहा जा रहा है कि एनडीए को वोट देने वाले इतना टाइम नहीं दे पाएंगे जबकि महागठबंधन के वोटर्स के पास टाइम ही टाइम है. जाहिर है कि इस बात में दम है. पर एनडीए को अपनी तैयारी और संसाधनों के बल पर भरोसा है कि प्रवासी बिहारियों का अधिकतर वोट उसे ही मिलेगा. आइए देखते हैं कि प्रवासी बिहारियों को पटाने में सबसे आगे कौन दिख रहा है?
बिहार में कुल प्रवासी वोटर्स और उनका प्रभाव
सबसे पहले देखते हैं कि बिहार में कुल प्रवासी वोटर कितने हैं. बिहार आर्थिक सर्वे 2024 के अनुसार, 3 करोड़ से अधिक बिहारी देश के विभिन्न हिस्सों में रोजगार के लिए पलायन करते हैं. इनमें लगभग 50 लाख पंजीकृत मतदाता हैं, जो निर्वाचन आयोग (ECI) की वोटर लिस्ट में शामिल हैं. यह आंकड़ा NSSO 78वां राउंड (2020-21) और ECI की जनवरी 2025 अपडेट पर आधारित है. दिल्ली-NCR में सबसे अधिक करीब 12 प्रतिशत बिहारी समुदाय रोजगार के लिए आते है. दूसरे नंबर पर गुजरात है जहां करीब 8 प्रतिशत बिहारी प्रवासी मजदूरों को रोजगार मिलता है. इस सूची में महाराष्ट्र 7 प्रतिशत के साथ तीसरे नंबर पर, हरियाणा 5 प्रतिशत और पंजाब 4 प्रतिशत के चौथे और पांचवें नंबर पर है.
मतलब साफ है कि अधिकतर बिहारी बीजेपी शासित राज्यों में ही हैं. जाहिर है कि इसका सबसे अधिक फायदा बीजेपी उठाने की तैयारी में है. छठ पूजा (27- 28 अक्टूबर 2025) के दौरान IRCTC की 200+ स्पेशल ट्रेनों में 1 करोड़ से अधिक यात्रियों की बुकिंग हुई है. जबकि 2020 के आंकड़ों के अनुसार, 50 लाख में से 25-30 लाख ही घर आकर वोट डाल पाते हैं. शेष काम की मजबूरी, ट्रेन की भीड़ या आर्थिक दबाव के कारण नहीं आ पाते.
ECI ने Form-12D के जरिए बाहर रहते हुए वोट डालने की सुविधा दी है, लेकिन 95% से अधिक प्रवासी घर आकर ही मतदान करते हैं. अब तक इतिहास रहा है कि अगर प्रवासी वोटर्स का प्रतिशत बढ़ता है तो एनडीए की जीत सुनिश्चित होती है. माना जाता है कि 2005 में प्रवासी वोटर्स के चलते 45% से 52% तक बढ़ गया नतीजा यह हुआ कि NDA की जीत हुई. इसी तरह 2010 में छठ पर घर लौटे 28 लाख वोटरों ने नीतीश को दूसरी बार सत्ता दिलाई. 2020 में वोटिंग प्रवासी वोटर्स के चलते 6% वोटिंग अधिक हुई और NDA को 125 सीटें मिलीं.

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