
पूर्वनियोजित था शेख हसीना का तख्तापलट... खुद मुहम्मद यूनुस ने किया खुलासा, मास्टरमाइंड का नाम भी बताया
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इस इवेंट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें मंच पर मुहम्मद यूनुस के बगल में महफूज आलम भी खड़ा है. साथ में कुछ और युवा खड़े हैं. यूनुस महफूज के कंधे पर हाथ रखे हुए हैं और उसकी तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं.
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने मंगलवार को देश में हाल के विरोध प्रदर्शनों के पीछे के 'मास्टरमाइंड' का खुलासा किया, जिसके कारण अंततः शेख हसीना को सत्ता से बाहर होना पड़ा था. उन्होंने यह भी कहा कि यह एक स्वाभाविक जनविद्रोह नहीं था बल्कि सावधानीपूर्वक डिजाइन किया सुव्यवस्थित और अनुशासित आंदोलन था. मुहम्मद यूनुस ने ये बातें संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र के इतर न्यूयॉर्क में क्लिंटन ग्लोबल इनिशिएटिव इवेंट में अपने संबोधन के दौरान कहीं. बांग्लादेश के प्रमुख अंग्रेजी अखबार ढाखा ट्रिब्यून में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक मुहम्मद यूनुस ने अपने विशेष सहायक महफूज आलम को शेख हसीना सरकार के विरोध में हुए देशव्यापी आंदोलन का मास्टरमाइंड बताया.
यूनुस ने इवेंट के दौरान अपने संबोधन में महफूज की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा, 'यह वह जिम्मेदारी है जिसे हम एक साथ लेते हैं. इसमें वह (महफूज आलम) किसी भी अन्य युवा की तरह दिखते हैं, जिन्हें आप पहचान नहीं पाएंगे. लेकिन जब आप उन्हें काम करते हुए देखेंगे, जब आप उन्हें बोलते हुए सुनेंगे तो हिल जाएंगे. उन्होंने अपने भाषणों, समर्पण और प्रतिबद्धता से पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. इन्हें संपूर्ण क्रांति (शेख हसीना सरकार विरोध प्रदर्शनों) के पीछे के मास्टरमाइंड के रूप में जाना जाता है. यह इससे इनकार करते हैं, लेकिन ये ऐसे ही हैं.'
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महफूज आलम था आंदोलन का मास्टरमाइंड
इस इवेंट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें मंच पर मुहम्मद यूनुस के बगल में महफूज आलम भी खड़ा है. साथ में कुछ और युवा खड़े हैं. यूसुफ महफूज के कंधे पर हाथ रखे हुए हैं और उसकी तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं. महफूज आलम मुस्कुरा रहा है. शेख हसीना सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बारे में बात करते हुए मुहम्मद यूनुस कहते हैं, 'यह आश्चर्यजनक था. यह यूं ही अचानक नहीं आया. सावधानीपूर्वक डिजाइन किया गया था, यहां तक कि लीडरशिप पैटर्न भी. लोग नहीं जानते कि इस आंदोलन के नेता कौन हैं. आप एक को पकड़कर यह नहीं कह सकते थे, कि आंदोलन खत्म हो गया. यह खत्म नहीं हुआ क्योंकि नेतृत्व में विविधता थी, पूरे आंदोलन का कोई एक नेता नहीं था.'
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