
पुलिस का घेरा, सरेंडर और फिर एनकाउंटर... कोर्ट केस की डायरी से जानिए गैंगस्टर आनंदपाल के फेक एनकाउंटर की रीयल स्टोरी
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कुख्यात गैंगस्टर रहे आनंदपाल सिंह एनकाउंटर मामले में नया मोड़ आ गया है. सीबीआई कोर्ट ने इसे कथित फर्जी एनकाउंटर बताया है और सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. 24 जून 2017 को चूरू के मालासर गांव में एसओजी ने आनंदपाल का एनकाउंटर किया था. कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट भी खारिज कर दी है.
राजस्थान के चर्चित गैंगस्टर आनंदपाल सिंह एनकाउंटर मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है और कथित फर्जी मुठभेड़ करने वाले 7 पुलिस अफसरों के खिलाफ हत्या का केस चलाए जाने का आदेश दिया है. अदालत ने केंद्रीय जांच एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट भी खारिज कर दी है और निर्देश दिया कि इसमें शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और अन्य आरोपों में FIR दर्ज की जाए.
इसके साथ ही आनंदपाल के फेक एनकाउंटर की रीयल स्टोरी भी सामने आ गई है. आनंदपाल के वकील ने कोर्ट में इस बात के पुख्ता सुबूत दिए कि पहले पुलिस ने एक घर के बाहर घेरा डाला, फिर आनंदपाल को छत पर जाकर सरेंडर करवाया और उसके बाद करीब से गोली मार दी. बाद में इसे एनकाउंटर का दावा कर दिया. इतना ही नहीं, जिस पिस्तौल से गोली मारी गई, वो एक पुलिसवाले की थी. जबकि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में उस पुलिसवाले के मौके पर मौजूद होने का जिक्र ही नहीं किया गया.
आनंदपाल की पत्नी ने दायर की थी याचिका
अदालत का ये आदेश आनंदपाल की पत्नी राज कंवर की याचिका पर आया है. इस याचिका में सीबीआई की उस क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी गई थी, जिसमें तत्कालीन चूरू एसपी राहुल बारहट, डीएसपी (कुचामन सिटी) विद्या प्रकाश, इंस्पेक्टर सूर्य वीर सिंह और अन्य को क्लीन चिट दी गई थी.
मालासर गांव में कथित मुठभेड़ में मारा गया था आनंदपाल
गैंगस्टर आनंदपाल सिंह 24 जून 2017 की रात चूरू के गांव मालासर में कथित पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था. पुलिस ने दावा किया था कि जिस घर में वो छिपा हुआ था, उसकी घेराबंदी करने के बाद उसे सरेंडर करने के लिए कहा गया, लेकिन आनंदपाल ने पुलिस पर गोलीबारी शुरू कर दी और जवाबी कार्रवाई में आनंदपाल मारा गया. घटना में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए और 18 दिन तक शव रखकर विरोध-प्रदर्शन हुए. उसके बाद दिसंबर 2017 में राजस्थान सरकार ने इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया था.

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