
पुरानी साजिश, नया हथियार और हिज्बुल्लाह पर वार दर वार... इजरायली प्लान की जड़ें खोजने में छूटेंगे लेबनान के पसीने
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पहले 3000 से ज्यादा पेजर में ब्लास्ट हुआ. 12 मौतें हुईं और 3000 से ज़्यादा लोग घायल हो गए. फिर वॉकी-टॉकी में ताबड़तोड़ धमाके हुए. 20 लोग मारे गए और 450 से ज़्यादा लोग घायल हो गए. अब सोलर सिस्टम में भी धमाके होने लगे. जिसकी वजह से अब तक 6 से ज्यादा लोग घायल हो गए.
Lebanon Serial blasts Mossad Israel Dreadful Conspiracy: लेबनान में दो दिनों में दो अनोखे तरह की सीरियल ब्लास्ट हुए. जिससे इजरायल और उसकी खुफिया एजेंसी मोसाद का नाम सुर्खियों में आ गया. पूरी दुनिया इस हमले से हैरान है और इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मोसाद ने आखिर इस खौफनाक साजिश को कैसे अंजाम दिया? अब तक मिली तमाम खबरों के मुताबिक, मोसाद ने इस अजब हमले की तैयारी दो साल पहले ही शुरू कर दी थी. दो साल पहले मोसाद ने एक फर्जी पेजर कंपनी खोली. और इसके बाद वो हिज्बुल्लाह के ऑर्डर का इंतजार करने लगे. ये साजिश और इसकी कहानी आपको हैरान कर देगी.
इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल डिवाइसेज़ से डर रहे लोग पहले 3000 से ज्यादा पेजर में ब्लास्ट हुआ. 12 मौतें हुईं और 3000 से ज़्यादा लोग घायल हो गए. फिर वॉकी-टॉकी में ताबड़तोड़ धमाके हुए. 20 लोग मारे गए और 450 से ज़्यादा लोग घायल हो गए. अब सोलर सिस्टम में भी धमाके होने लगे. जिसकी वजह से अब तक 6 से ज्यादा लोग घायल हो गए. लेबनान में तीन दिनों से चल रहे धमाकों का असर कुछ ऐसा है कि अब लोग पेजर और वॉकी टॉकी तो छोड़िए, मोबाइल फोन के साथ-साथ हर तरह के इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल डिवाइसेज़ तक छूने से भी घबराने लगे हैं.
एयरपोर्ट पर वॉकी-टॉकी और पेजर्स पर बैन हिज्बुल्लाह ने एक बार फिर से अपने लड़ाकों से मोबाइल फोन की बैट्री निकाल कर दूर फेंकने की बात कही है. जबकि राजधानी बेरूत के रफीक हरीरी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पैसेंजर्स के वॉकी-टॉकी और पेजर्स लेकर जाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है. यानी लेबनान की हालत फिलहाल कुछ ऐसी है कि लोगों को समझ में नहीं आ रहा कि कब कहां कौन सी चीज़ फट जाए, जो मौत और तबाही की वजह बने.
दो साल पुरानी साजिश लेबनान में मची इस भयानक तबाही का इल्ज़ाम तो ख़ैर पहले दिन से ही इज़रायल पर है. ये और बात है कि इज़रायल ने अब तक ऑफिशियली इस साज़िश में शामिल होने की बात नहीं कही है, लेकिन इन धमाकों को लेकर सूत्रों के हवाले से जो-जो और जैसी-जैसी कहानियां सामने आ रही हैं, वो दिमाग चकराने वाली हैं. और इन तथ्यों के मुताबिक लेबनान पर हुए इस हमले की साज़िश कोई चंद दिनों या महीनों से नहीं बल्कि करीब दो साल से या फिर उससे भी पहले चल रही थी.
साज़िश नंबर-1- ऑपरेशन पेजर हिज्बुल्लाह को खून के आंसू रुलाने वाली इस साज़िश की तैयारी इज़रायल ने तभी शुरू कर दी थी, जब ये संगठन मोबाइल फोन को छोड़ कर पेजर की तरफ शिफ्ट हो रहा था. असल में इज़रायल अक्सर मोबाइल फोन की बदौलत हिज्बुल्लाह के लड़ाकों की लोकेशन ट्रैक कर लिया करता था. जिससे हिज़्बुल्लाह के लड़ाके या तो इंटरसेप्ट कर लिए जाते थे. या फिर इज़रायल के हमलों में बेमौत मारे जाते थे. लिहाज़ा, संगठन के मुखिया नसरुल्लाह ने अपने लड़ाकों से मोबाइल फोन की जगह पेजर और वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल करने की बात कहनी शुरू कर दी थी. साल 2022 में नसरुल्लाह ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपने लड़ाकों को पेजर और वॉकी-टॉकी के इस्तेमाल करने की सलाह दी थी और बस यही वो वक़्त था, जब इज़रायल ने ऑपरेशन पेजर की बुनियाद रख दी.
इज़रायल ने यूरोपीय मुल्क हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में सिर्फ इसी ऑपरेशन के लिए एकाएक तीन शेल कंपनियां खड़ी कर दीं. शेल कंपनी यानी ऊपर से जिसका काम कुछ और हो और असल में कुछ और. और इन्हीं कंपनीज़ में से एक थी बी-ए-सी कंसल्टिंग के-एफ-टी, जिसने पेजर बनाने का काम शुरू कर दिया. बुडापेस्ट के एक रिहायशी इलाके में मौजूद यही वो इमारत है, जहां बी-ए-सी कंसल्टिंग के-एफ-टी का सारा काम होता था. ज़ाहिर है एक पॉश इलाके में मौजूद किसी कंपनी के ऐसे दफ्तर पर भला कोई कैसे शक करता?

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