
पुणे पोर्श कार कांड: केस में जोड़ी गई दो नई धाराएं, पुलिस हिरासत में आरोपी की मां
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महाराष्ट्र के पुणे शहर में हुए पोर्श कार कांड की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने नाबालिग आरोपी के पिता, माता और दोनों डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज केस में आईपीसी की धारा 471 और 473 जोड़ी है. इस मामले में आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल और दादा सुरेंद्र अग्रवाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 365 (अपहरण) और 368 (गलत तरीके से छिपाना) के तहत केस पहले से ही दर्ज है.
महाराष्ट्र के पुणे शहर में हुए पोर्श कार कांड की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने नाबालिग आरोपी के पिता, माता और दोनों डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज केस में आईपीसी की धारा 471 और 473 जोड़ी है. इस मामले में आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल और दादा सुरेंद्र अग्रवाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 365 (अपहरण) और 368 (गलत तरीके से छिपाना) के तहत केस पहले से ही दर्ज है. सभी आरोपी इस वक्त पुलिस की हिरासत में हैं.
पुणे पुलिस ने शनिवार सुबह आरोपी की मां शिवानी अग्रवाल को भी गिरफ्तार कर लिया. उनके ही ब्लड सैंपल से आरोपी का सैंपल बदला गया था. कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस ने नाबालिग से उसकी मां की मौजूदगी में करीब एक घंटे तक रिमांड होम में पूछताछ की है. आरोपी की मां को 5 जून तक के लिए पुलिस हिरासत में भेजा गया है. पुलिस ने दो दिन पहले ही कोर्ट को बताया था कि आरोपी की मां से उसका ब्लड सैंपल बदला गया था.
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) शैलेश बलकावड़े ने बताया, "हमने नाबालिग की मां की मौजूदगी में रिमांड होम में उससे पूछताछ की है. आरोपी के ब्लड सैंपल को उसकी मां से ही बदला गया था.'' किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) ने शुक्रवार को पुणे पुलिस को आरोपी से पूछताछ करने की अनुमति दी थी. किशोर न्याय अधिनियम के तहत किसी भी नाबालिग आरोपी से पूछताछ उसकी माता-पिता की मौजूदगी में ही की जा सकती है.
इस मामले में आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल, दादा सुरेंद्र अग्रवाल, मां शिवानी अग्रवाल और ससून अस्पताल के दो डॉक्टरों डॉ अजय तवारे, डॉ श्रीहरि हलनोर, एक कर्मचारी अतुल घाटकांबले पहले से ही पुलिस हिरासत में है. पुणे पुलिस सभी आरोपियों को एक साथ बैठाकर पूछताछ करने वाली है. डॉक्टर अजय ने ही आरोपी के पिता से तीन लाख रुपए लेकर ब्लड सैंपल की हेराफेरी की थी. इसमें डॉ श्रीहरि और कर्मचारी अतुल ने उनका साथ दिया था.
पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने बताया कि आरोपियों ने अपने ड्राइवर गंगाराम पर इस हादसे की जिम्मेदारी लेने का दबाव बनाया था. 19 मई को नाबालिग आरोपी ने अपनी पोर्श कार से दो सॉफ्ट इंजीनियरों की जान ले ली थी. इसके बाद आरोपी के ड्राइवर ने बयान दिया था कि हादसे के वक्त कार वो चला रहा था. लेकिन सबूतों के आधार पुलिस ने खुलासा कर दिया कि ड्राइवर को पैसे का लालच देकर जिम्मेदारी लेने के लिए दबाव बनाया गया था.
आरोपी के दादा ने ड्राइवर को लालच देकर ऐसे दबाव बनाया

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