
पानी में डूबकर या आग में जलकर... आखिर कैसे होगा दुनिया का अंत? जानिए 10 कारण
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दुनिया के अंत को लेकर विशेषज्ञ तमाम तरह के कयास लगाते हैं. किसी का कहना है कि एलियंस के हमला करने के बाद सब खत्म हो जाएगा. तो किसी का मानना है कि ऐसा सुनामी से होने वाली तबाही के कारण होगा.
दुनिया के अंत को लेकर आए दिन चर्चा होती है. कोई कहता है कि एक दिन एलियंस धरती पर हमला कर देंगे, और दुनिया खत्म हो जाएगी. तो कोई कहता है कि सुनामी आने से ऐसा होगा. इसे लेकर तमाम फिल्में भी बन चुकी हैं. वैज्ञानिक डूम्सडे क्लॉक के जरिए भी वक्त वक्त पर चेतावनी देते हैं कि दुनिया विनाश के बेहद करीब है. जनवरी, 2022 में खबर आई थी कि दुनिया तबाही से महज 100 सेकंड दूर है.
अब तीन साल में पहली बार कहा जा रहा है कि दुनिया तबाही से 90 सेकंड दूर है. इसके पीछे का कारण यूक्रेन युद्ध को भी माना जा रहा है. इस घड़ी का काम यह बताना है कि हम मानव निर्मित आपदा के कितना करीब हैं. आज हम उन 10 संभावित कारणों के बारे में जानेंगे, जिनके कारण दुनिया के अंत की आशंका जताई जाती है. इससे पहले डूम्सडे क्लॉक के बारे में जान लेते हैं.
यह एक प्रतीकात्मक घड़ी है, जो मानवीय गतिविधियों के कारण वैश्विक तबाही की संभावना के बारे में बताती है. इसमें आधी रात के 12 बजे को सबसे बड़े खतरे के संकेत के तौर पर देखा जाता है. वैज्ञानिकों ने 1945 में जापान पर परमाणु हमला होने के बाद मानव जनित खतरों के बारे में दुनिया को चेतावनी देने के लिए ये घड़ी बनाई थी. इसमें रात के 12 बजे के वक्त का मतलब है, दुनिया का अंत बेहद करीब है.
ये परमाणु युद्ध और जलवायु संकट के खतरे का संकेत देती है. वैज्ञानिक इस घड़ी के जरिए 1947 से बता रहे हैं कि दुनिया तबाही से कितना दूर है. तो चलिए अब उन 10 कारणों पर बात कर लेते हैं, जिनके चलते दुनिया का अंत होने की बात कही जाती है. इसे लेकर डेली मेल ऑनलाइन ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है.
डायनासोर के अंत का कारण बना उल्कापिंड धरती का अंत कर सकता है. Chicxulub उल्कापिंड समुद्र में आकर गिरा था, जिसे आज मेक्सिको की खाड़ी कहा जाता है. इससे भीषण सुनामी आई. इससे बड़ी मात्रा में धूल के बादल बने जिसने जलवायु परिवर्तन की गति को बढ़ा दिया. इसकी वजह से धरती पर मौजूद रहे 75 फीसदी जानवरों और पौधों की प्रजातियों का खात्मा हो गया. एस्ट्रोनॉमर्स का मानना है कि ऐसा विशाल उल्कापिंड हर 100 मिलियन साल में एक बार हमारे ग्रह से टकराता है. अब ऐसा दोबारा होने का अनुमान अगले 30 मिलियन साल में जताया गया है.
हाल के वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) सिस्टम्स का तेजी से विकास हुआ है. इसे लेकर हमेशा से ही बहस छिड़ी रह रही है कि इस तकनीक से इंसान को ज्यादा फायदा हो रहा है, या ये उसके लिए बड़ा खतरा है. विशेषज्ञ इसे बड़े खतरे के तौर पर भी देखते हैं. मामला तब ज्यादा गंभीर हो गया था, जब इसी साल 1000 से अधिक टेक टायकून्स ने एक लेटर पर हस्ताक्षर कर AI को अडवांस बनाए जाने की 'खतरनाक दौड़' पर विराम लगाने की अपील की थी. इन्होंने कहा कि इंसान तकनीक पर से नियंत्रण खो दे और रोबोट द्वारा उन्हें मिटाए जाने का खतरा पैदा हो जाए, उससे पहले तत्काल एक्शन लिए जाने की जरूरत है.

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