
पाकिस्तान में हिंदू डॉक्टर की गोली मारकर हत्या, एक महीने में दूसरी बार टारगेट किलिंग
AajTak
पाकिस्तान में हिंदू डॉक्टर की गोली मारकर हत्या कर दी गई. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, एक महीने में दूसरी बार टारगेट किलिंग में डॉक्टर की हत्या हुई है. इस घटना में उनके असिस्टेंट भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
पाकिस्तान में एक बार फिर हिंदू डॉक्टर को निशाना बनाया गया है. कराची नगर निगम के रिटायर्ड डायरेक्टर और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. बीरबल जेनानी की ल्यारी एक्सप्रेसवे के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस हमले में उनके असिस्टेंट कुरात-उल-ऐन भी गंभीर रूप से घायल हो गए. दोनों एक ही कार में यात्रा कर रहे थे.
स्थानीय मीडिया ने बताया कि कराची नगर निगम के पूर्व निदेशक और नेत्र रोग विशेषज्ञ की हत्या कर दी गई. पाकिस्तान में एक महीने में दूसरे बार किसी हिंदू डॉक्टर को निशाना बनाया गया है. इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है.
इस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ही टारगेट किलिंग होने का संदेह जताया जा रहा है. इस महीने पाकिस्तान में हिंदू डॉक्टर पर हमले का यह दूसरा मामला है. इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान के हैदराबाद में एक डॉक्टर धर्म देव राठी की उनके ड्राइवर ने ही घर के अंदर हत्या कर दी थी. पुलिस ने पाकिस्तानी न्यूज आउटलेट द नेशन को बताया कि ड्राइवर ने चाकू से डॉक्टर का गला काट दिया था. पुलिस ने ड्राइवर को खैरपुर स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया और उसकी पहचान हनीफ लेघारी के रूप में की गई.
डॉक्टर के रसोइए ने पुलिस को बताया कि घर जाते समय दोनों में कहासुनी हो गई थी. इसके बाद जब वो दोनों घर पहुंचे तो ड्राइवर ने कथित तौर पर रसोई से चाकू लिया और अपने ही घर में डॉक्टर की हत्या कर दी.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार यानि 18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आपात बैठक की. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद बुलाई गई. जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही है. जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोपीय संध के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस धमकी की कड़ी निंदा की है.








