
पाकिस्तानी सेना का एक और झूठ पकड़ा गया, आजतक के VIDEO से छेड़छाड़ कर ये दिखाया
AajTak
पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान का झूठ और प्रोपेगेंडा लगातार जारी है.कभी अपने नाकाम हमलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है, तो कभी यह दावा करता है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने नागरिक ठिकानों, मस्जिदों और नीलम-झेलम जल परियोजना को निशाना बनाया, लेकिन भारत ने हर बार इन झूठे आरोपों को ठोस सबूतों के साथ खारिज किया है. PIB, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और कई फैक्ट-चेकर्स ने पाकिस्तान की हर झूठी कहानी का पर्दाफाश किया है.
पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान का झूठ और प्रोपेगेंडा लगातार जारी है.कभी अपने नाकाम हमलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है, तो कभी यह दावा करता है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने नागरिक ठिकानों, मस्जिदों और नीलम-झेलम जल परियोजना को निशाना बनाया, लेकिन भारत ने हर बार इन झूठे आरोपों को ठोस सबूतों के साथ खारिज किया है. PIB, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और कई फैक्ट-चेकर्स ने पाकिस्तान की हर झूठी कहानी का पर्दाफाश किया है.
ताजा मामला भी इसी सिलसिले की एक कड़ी है. DG ISPR की प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तान ने आज तक न्यूज़ चैनल के एक वीडियो क्लिप का छोटा सा हिस्सा दिखाकर दावा किया कि भारतीय एयरफील्ड तबाह कर दी गई है.
पाकिस्तान का झूठ: पाकिस्तानी सेना ने आज तक की रिपोर्ट का वीडियो एडिट कर, क्लिप को क्रॉप किया और उसे इस अंदाज़ में पेश किया जैसे भारत का एयरबेस नष्ट हो गया हो. यह वीडियो एकतरफा तरीके से एडिट किया गया था ताकि पाकिस्तान की झूठी जीत को दुनिया के सामने सच दिखाया जा सके.
यह भी पढ़ें: पिता देता था लादेन को परमाणु बम का सीक्रेट, पाकिस्तान की झूठ फैक्ट्री का चेहरा...कौन है अहमद शरीफ चौधरी
सच्चाई क्या है? असल में, 10 मई को आज तक की लाइव बुलेटिन में बताया गया था कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान का एक एयरफील्ड और लॉन्च पैड तबाह कर दिया है, जिससे पाकिस्तान में अफरा-तफरी और घबराहट फैल गई. DG ISPR ने इसी रिपोर्ट की क्लिप को काटकर यह झूठ फैलाया कि भारतीय एयरफील्ड तबाह हुआ है.
देखें PIB का पोस्ट

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












