
परफेक्ट दिखने के प्रेशर पर भड़कीं संदीपा धर, बोलीं- थोपना बंद करें ब्यूटी स्टैंडर्ड्स
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एक्ट्रेस संदीपा धर ने कहा कि 'दो दीवाने शहर में' में उनका किरदार रिलेटेबल है क्योंकि वह अपनी बहन और परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ लगातार तुलना का शिकार होती है. एक्ट्रेस ने ब्यूटी स्टैंडर्ड्स की बहस पर भी रिएक्ट किया.
हाल ही में रिलीज हुई रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'दो दीवाने शहर में' एक्ट्रेस संदीपा धर ने मृणाल ठाकुर की बड़ी बहन नैना का रोल किया है. यह फिल्म कलरिज्म जैसे टॉपिक पर बात करती है, साथ ही पहले से बने ब्यूटी स्टैंडर्ड को भी तोड़ती है. संदीपा और मृणाल के कैरेक्टर को इस तरह से बनाया गया है कि वे सभी स्टीरियोटाइप को तोड़ते हैं.
Zoom के साथ एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में संदीपा ने नैना का रोल करने और उन महिलाओं की आवाज बनने के बारे में खुलकर बात की, जो तुलना, उम्मीदों पर खरा उतरने के प्रेशर और भारी महसूस होने पर भी ब्यूटी स्टैंडर्ड को पूरा करने के बोझ तले दबी हुई हैं. संदीपा ने आगे इस पर भी रिएक्ट किया कि क्या एक्ट्रेस को एक खास तरह से दिखने के लिए एक्स्ट्रा प्रेशर झेलना पड़ता है, जिससे ऑडियंस इंस्पायर हो सके?
संदीपा धर ने क्या कुछ कहा? संदीपा ने कहा, 'नैना, एक परफेक्ट महिला होने के बावजूद शादी के बाद अपना सेल्फ-कॉन्फिडेंस खो देती है. वह डाइट के इस कभी न खत्म होने वाले चक्कर में फंसी हुई है, जिसका हम सभी अपनी जिंदगी में कभी न कभी हिस्सा रहे हैं. वह सुंदर दिखने और वैलिडेशन पाने की कोशिश कर रही है. उसे लगातार कुछ करने की जरूरत है ताकि वह बेहतर दिख सके और उसकी तारीफ हो सके.'
एक्ट्रेस ने आगे कहा, 'आज के समय में यह बहुत रिलेटेबल है. हम सब Instagram ऐड देख रहे हैं, जहां लोग एजिंग को डिफेंड करने, बेहतर ग्लो करने और पेट की चर्बी कम करने के लिए प्रोडक्ट्स प्रमोट कर रहे हैं. हम सब कभी न कभी इससे गुजरे हैं. हम एक ऐसे पॉइंट पर पहुंच जाते हैं, जहां हम जो हैं वह कभी काफी नहीं होता. अगर हमारे बाल परफेक्ट हैं, तो हम अपनी स्किन को ठीक करने की कोशिश करते हैं. अगर स्किन ग्लो कर रही है, तो हम कुछ और चाहते हैं जो फ्लॉलेस हो.'
भाई-बहन की तुलना पर क्या कहा? भाई-बहनों से तुलना के बारे में बात करते हुए, संदीपा ने बताया, 'भारतीय परिवारों में हम लगातार तुलना से जूझते हैं. यही आप फिल्म में भी देखते हैं. मैंने इसे अपने भाई के साथ देखा है. बड़े होते हुए मेरी और उसकी लगातार तुलना की जाती थी. यह स्कूल टीचर के सामने पूछा जा सकता है. अगर आप अपने भाई के साथ एक ही स्कूल में हैं, तो टीचर हमेशा कहेंगे, 'तुम अपने भाई या बहन की तरह क्यों नहीं बन सकते?' या आपकी मां कहेंगी, 'तुम अपने भाई की तरह ज्यादा क्यों नहीं बन सकते? ये बातें माता-पिता को पता नहीं होतीं कि यह ट्रॉमा हो सकता है. जब आप बड़े होते हैं, तो बच्चे एक खास तरह से व्यवहार करने लगते हैं. तुलना करना बहुत बुरी बात हो सकती है.'
ब्यूटी ट्रीटमेंट पर दिया बयान संदीपा ने आगे साफ किया कि एक्टर्स को ब्यूटी ट्रीटमेंट और स्टैंडर्ड सेट करने के लिए ऑडियंस के लिए इंस्पिरेशन बनने का प्रेशर नहीं लेना चाहिए. उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि एक्टर्स को ऐसे फैसलों के लिए जिम्मेदार होना चाहिए. हां, हम रोल मॉडल बन सकते हैं और अपनी कोशिशों से लोगों को इंस्पायर कर सकते हैं. एक्टर्स को ऐसा प्रेशर नहीं लेना चाहिए.'

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