
न्याय के लिए बजट: कम आवंटन, अधूरा उपयोग
The Wire
भारतीय न्यायिक व्यवस्था दोहरे संकट से गुज़र रही है. एक ओर न्यायिक क्षेत्र को कम बजट मिलता है और दूसरी ओर उपलब्ध बजट का पूरा और प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा. नतीजा यह है कि पुलिस, जेल, न्यायालय, क़ानूनी सहायता, फॉरेंसिक और मानवाधिकार संस्थाएं, सभी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रहे हैं.
देश का आम बजट 1 फरवरी 2026 को पेश हो गया. हर वर्ष की भांति इस बार भी रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों को मिला आवंटन चर्चा के केंद्र में है. लेकिन नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता और अधिकारों से सीधे जुड़ी एक और बुनियादी जरूरत अक्सर हाशिए पर रह जाती है. यह जरूरत है- न्याय.
समय पर और प्रभावी न्याय मिलना किसी भी लोकतांत्रिक समाज की रीढ़ है और यह तभी संभव है जब न्यायिक व्यवस्था को पर्याप्त और विवेकपूर्ण बजटीय आवंटन मिले.
न्यायिक प्रणाली का सुचारू संचालन पुलिस, न्यायपालिका, जेल, कानूनी सहायता, फॉरेंसिक और राज्य मानवाधिकार संस्थाओं को मिले बजट पर निर्भर करता है. इसलिए आम बजट में न्यायिक क्षेत्र को मिलने वाले महत्व की पड़ताल भी जरूरी है. हमें देखने को मिला है कि भारत में न्यायिक बजट न केवल अपर्याप्त है, बल्कि उपलब्ध बजट का प्रभावी उपयोग भी नहीं हो पा रहा है. इसका सीधा असर न्याय मिलने की गति और गुणवत्ता पर पड़ता है.
राष्ट्रीय तस्वीर समझने को राज्यों पर नजर जरूरी
न्यायिक व्यवस्था के लिए बजट केवल केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारें भी जारी करती हैं. ऐसे में केवल आम बजट के आंकड़ों के आधार पर पूरे न्यायिक क्षेत्र का आकलन अधूरा रहेगा. इसी कारण इंडिया जस्टिस रिपोर्ट (आईजेआर) ने देश के 11 सर्वाधिक जीडीपी वाले राज्यों में 2023-24 और 2024-25 के न्यायिक बजट का अध्ययन किया.
इन 11 राज्यों में आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल हैं. सभी राज्यों की आबादी 1 करोड़ से अधिक है. केरल जीडीपी के लिहाज से 11वें स्थान पर था, लेकिन नए आंकड़े उपलब्ध न होने के कारण इस अध्ययन में हरियाणा को शामिल किया गया.

लोकसभा में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि मणिकर्णिका घाट एएसआई के तहत संरक्षित स्मारक नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि घाट पर चल रहा कार्य घाट की गरिमा को बहाल करने के उद्देश्य से किए जा रहे जीर्णोद्धार और संरक्षण परियोजना का हिस्सा है.

देश में एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के बीच गुरुवार को संसद में जारी बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान ज़ोरदार हंगामा देखने को मिला. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार पर इस मुद्दे पर ग़लत जानकारी देने का आरोप लगाया और इस पर संसद के भीतर विस्तृत चर्चा की मांग की. हालांकि, सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त भंडार हैं.

ईरान संघर्ष के बीच कंटेनर जहाजों की कमी के कारण कच्चे माल की कीमतों में करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते भारत में दवाओं के दाम तेज़ी से बढ़ने की आशंका है. उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि जहाजों की कमी के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) की आपूर्ति प्रभावित हुई है. चीन भारतीय दवा निर्माताओं के लिए कच्चे माल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक ने ‘प्रेस नोट 3’ के जरिए भारत के साथ स्थल सीमा साझा करने वाले देशों, मुख्य रूप से चीन पर लगाए गए प्रतिबंधों को वापस लेने का फैसला किया है. यह नियम इन देशों से आने वाले स्वत: निवेश पर रोक लगाता था. विपक्षी दलों ने इस निर्णय को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है.

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते मार्च 2026 की शुरुआत से विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ), जो किसी एयरलाइन की परिचालन लागत का लगभग 40% हिस्सा होता है, की आपूर्ति में रुकावटों के कारण क़ीमतों में काफी वृद्धि हुई है, जिसके चलते एयर इंडिया समूह ने अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर चरणबद्ध तरीके से फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का निर्णय लिया है.

ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बीच भारत के कई राज्यों में एलपीजी सिलेंडरों को लेकर चिंता बढ़ गई है. कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं. हालांकि सरकार ने देश में गैस की कमी से इनकार किया है. अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा स्थिति घबराहट में बढ़ी बुकिंग और वितरण बाधाओं से बनी है.

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विधानसभा में बताया कि जून 2024 से अब तक राज्य में 54 सांप्रदायिक दंगे और सात मॉब लिंचिंग की घटनाएं दर्ज की गई हैं. सबसे अधिक 24 सांप्रदायिक दंगे बालासोर ज़िले में दर्ज किए गए, जबकि 16 मामले खुर्दा ज़िले में सामने आए. हालांकि इन मामलों में 50 प्रतिशत से भी कम मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया गया है.

दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में होली पर मुस्लिम महिला पर गुब्बारा फेंकने को लेकर हुए विवाद में 26 वर्षीय तरुण की हत्या के बाद रविवार को एमसीडी ने मुख्य आरोपियों के घर के कुछ हिस्से को अतिक्रमण बताते हुए ढहा दिया. वहीं आरोपी परिवार का कहना है कि हत्या उन्होंने नहीं की है. तरुण का परिवार न्याय की मांग कर रहा है, वहीं आरोपी परिवार की एक सदस्य का कहना है कि पड़ोसियों की लड़ाई को धर्म की लड़ाई बना दिया गया है.





