
नितिन नबीन ने विनोद तावड़े को सौंपा सबसे मुश्किल टास्क, बिहार की तरह केरल में खिला पाएंगे कमल?
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केरल में अप्रैल-माई में विधानसभा चुनाव होने हैं. नितिन नबीन ने बीजेपी की कमान संभालते ही केरल चुनाव की जिम्मेदारी विनोद तावड़े को सौंप दी है. बिहार की चुनावी जंग जिताने वाले विनोद तावड़े क्या केरल में कमल खिला पाएंगे, क्योंकि बिहार से अलग केरल का मिजाज है.
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी नितिन नबीन ने ऐसे समय संभाली है, जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, पुदुचेरी और केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी तेज है. इनमें से किसी भी राज्य में बीजेपी के लिए चुनावी लड़ाई आसान नहीं है. नितिन नबीन ने अपनी ताजपोशी के साथ पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के लिए ताबड़तोड़ फैसले लेने शुरू कर दिए हैं.
नितिन नबीन ने बीजेपी के लिए सबसे मुश्किल माने जाने वाले केरल विधानसभा चुनाव की कमान विनोद तावड़े को सौंपी तो साथ ही चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. उनके साथ शोभा करंदलाजे को सह प्रभारी बनाया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि विनोद तावड़े बिहार की तरह ही केरल में भी कमल खिला पाएंगे?
वहीं, आशीष शेलार को तेलंगाना नगर निकाय चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया है. उनके साथ अशोक परनामी व रेखा शर्मा को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा वरिष्ठ नेता राम माधव को ग्रेटर बेंगलुरु निकाय चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया गया है तो सतीश पुनिया और संजय उपाध्याय को सह प्रभारी का दातित्व सौंपा है.
विनोद तावड़े को मिला केरल का मुश्किल टास्क
मिशन साउथ के तहत बीजेपी दक्षिण भारत के तमाम राज्यों में अपनी सियासी जमीन तलाश रही है. फिर चाहे तमिलनाडु हो या फिर केरल विधानसभा चुनाव का मैदान. पीएम मोदी समेत तमाम बड़े नेताओं की नजर इन राज्यों पर टिकी है. ऐसे में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने केरल की चुनावी जंग को फतह करने के लिए बिहार चुनाव जिताने वाले विनोद तावड़े को सौंपी है, उन्हें विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाया है और साथ ही कर्नाटक से आने वाली शोभा करंदलाजे को सौंपा है.
केरल में सत्ता का रास्ते को ईसाई और मुस्लिम वोट के द्वारा तय होते है, जिसके चलते ही बीजेपी की राह काफी मुश्किल भरी रही है. बीजेपी केरल में तेजी से बढ़ी है, लेकिन सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने में यूडीएफ और एलडीएफ एक बड़ी बाधा हैं. केरल का चुनाव इन्हीं दोनों गठबंधन के बीच सिमटा हुआ है. हालांकि, बीजेपी को केरल में 2014 में14 प्रतिशत वोट मिले थे, 2019 में 16 प्रतिशत और 2024 में यह बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया. बीजेपी को केरल की सत्ता तक पहुंचने के लिए 20 से 30 और 30 से 40 फीसदी के वोट क का सफर तय करना है. ऐसे में विनोद तावड़े को एक मुश्किल भरा टास्क नितिन नबीन ने सौंपा है.

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