
धनखड़ से रिजिजू तक... जिस-जिसने ज्यूडिशियरी को दी चुनौती, उसकी चली गई कुर्सी!
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उपराष्ट्रपति जैसे पद से इस्तीफा देने की वजह सामान्य नहीं है, बल्कि जगदीप धनखड़ को लेकर बीजेपी का मन बदलने की वजह बड़ी है. धनखड़ साल 2022 में भारत के उपराष्ट्रपति बने थे. इसके बाद से लगातार चर्चा में बने हुए थे. जस्टिस यशवंत वर्मा का मामला प्रकाश में आने के बाद धनखड़ एनजेएसी जैसी संस्था को बहाल करने के लिए मोर्चा खोले हुए थे.
उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद देश की सियासत गरमा गई है. विपक्षी दल ही नहीं सत्तापक्ष के नेता भी हैरान हैं. धनखड़ ने अपनी इस्तीफे की वजह अपने स्वास्थ्य कारणों को बताया है, लेकिन यह बात किसी को हजम नहीं हो रही. जगदीप धनखड़ 11 दिन पहले तक अपने पांच साल के कार्यकाल को पूरा करने की बात रहे थे, आखिर क्या हुआ कि उन्होंने दो साल पहले ही कुर्सी छोड़ दी.
मॉनसून सत्र के पहले दिन जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा की कार्यवाही शुरू कराई और सदन को संबोधित किया. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को जन्मदिन की बधाई दी, लेकिन देर शाम उन्होंने इस्तीफा का ऐलान कर दिया. इसकी वजह जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ विपक्ष के द्वारा लाए गए महाभियोग के प्रस्ताव को नोटिस में लेने माना जा रहा है, लेकिन असल कारण सिर्फ विपक्ष के प्रस्ताव को नोटिस पर लेने का नहीं है बल्कि बात इससे कहीं आगे की है.
मोदी सरकार ने जरूर जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए संसद के दोनों ही सदनों में महाभियोग के प्रस्ताव पेश करने की योजना बनाई थी. इसके लिए सरकार ने विपक्ष से भी बातचीत कर रखा था और राहुल गांधी ने भी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए थे. ऐसे में विपक्ष के प्रस्ताव को राज्यसभा में नोटिस पर लेकर जरूर बीजेपी को नाराज कर दिया है, लेकिन वजह जगदीप धनखड़ का ज्यूडिशियरी से पंगा लेना था. धनखड़ से पहले किरेन रिजिजू की कानून मंत्री की कुर्सी ज्यूडिशियरी के साथ टकराने के चलते जा चुकी है. ज्यूडिशियरी से टकराना धनखड़ को पड़ा महंगा
देश के उपराष्ट्रपति जैसे पद से इस्तीफा देने की वजह सामान्य नहीं है, बल्कि जगदीप धनखड़ को लेकर बीजेपी का मन बदलने की वजह बड़ी है. धनखड़ साल 2022 में भारत के उपराष्ट्रपति बने थे. इसके बाद से लगातार चर्चा में बने हुए. हैं. जस्टिस यशवंत वर्मा का मामले प्रकाश में आने के बाद धनखड़ एनजीएसी जैसी संस्था को बहाल करने के लिए मोर्चा खोले हुए थे.
वहीं, मोदी सरकार स्पष्ट रूप से एनजेएसी जैसे किसी कदम से न्यायपालिका को नाराज करने के मूड में नहीं थी. इसके चलते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों एक चैनल के कार्यक्रम में साफ तौर पर कहा था कि सरकार का ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है. इसके बाद भी जगदीप धनखड़ के इस मुद्दे पर लगातार सार्वजनिक बयान दे रहे थे, जिसके चलते मैसेज यह जाने लगा कि सरकार का संदेश है.
धनखड़ के बयान, सरकार की चिंता

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