
दो प्रांतों में चुनाव कराना चाहते हैं PAK राष्ट्रपति आरिफ अल्वी, शहबाज सरकार बोली- मर्यादा में रहें
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राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने पाकिस्तान के मुख्य चुनाव आयुक्त को खैबर-पख्तूनख्वा और पंजाब में चुनाव की तारीखों पर चर्चा करने के लिए 20 फरवरी को एक तत्काल बैठक के लिए आमंत्रित किया है. इसके बाद पाकिस्तान की शरबाज शरीफ सरकार ने उन पर जमकर निशाना साधा है. रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अल्वी अपनी संवैधानिक मर्यादाओं में रहें.
पाकिस्तान इन दिनों आर्थिक संकट से जूझ रहा है, तंगहाली के बीच अब देश में सियासी सरगर्मी भी बढ़ती जा रही है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने खैबर-पख्तूनख्वा और पंजाब प्रांत में इलेक्शन के लिए तारीखों की घोषणा के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) सिकंदर सुल्तान राजा को आमंत्रित किया है. इसके बाद वह सरकार के मंत्रियों के निशाने पर आ गए हैं. शहबाज सरकार ने कहा है कि राष्ट्रपति अपनी संवैधानिक मर्यादाओं में रहें.
एजेंसी के मुताबिक शहबाज सरकार के मंत्रियों ने राष्ट्रपति आरिफ अल्वी की कड़ी आलोचना की है. सरकार के मंत्रियों ने कहा कि आरिफ अल्वी को पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना चाहिए. न कि इमरान खान के प्रवक्ता के तौर पर.
राष्ट्रपति अल्वी इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी से हैं, उन्होंने शनिवार को पाकिस्तान के मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान राजा को खैबर-पख्तूनख्वा और पंजाब में चुनाव की तारीखों पर चर्चा करने के लिए 20 फरवरी को एक तत्काल बैठक के लिए आमंत्रित किया है.
8 फरवरी को लिखे गए अपने पिछले पत्र पर राष्ट्रपति को पाकिस्तान चुनाव आयोग से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद पत्र लिखा है. दूसरे पत्र में राष्ट्रपति ने अपनी ओर से "उदासीनता और निष्क्रियता" पर नाराजगी व्यक्त की.
इस पर पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री राणा सनाउल्लाह ने कहा कि राष्ट्रपति का चुनाव की तारीख के ऐलान से कोई लेना-देना नहीं है. साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति पर ईसीपी के संवैधानिक अधिकार में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया और दावा किया कि इमरान खान राष्ट्रपति के कार्यालय के माध्यम से आयोग पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी चुनावी के मामलों में "हस्तक्षेप" करने के लिए राष्ट्रपति की आलोचना की. आसिफ ने ट्वीट किया कि आरिफ अल्वी अपनी संवैधानिक मर्यादाओं में रहें. राजनीति न करें, अपने लिए नहीं तो अपने पद के सम्मान के बारे में सोचिए. इसके साथ ही ख्वाजा आसिफ ने आरोप लगाया कि 2018 के आम चुनावों में हुए सिलेक्शन के परिणामस्वरूप अल्वी ने राष्ट्रपति पद पर "कब्जा" किया.

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