
दो थाने, कॉल्विन अस्पताल और हमला... अतीक-अशरफ की हत्या से ठीक पहले के आखिरी 3 घंटों की कहानी
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उस दिन पूरी रात अतीक और अशरफ सोये नहीं थे. दोनों लगातार असद की लाश प्रयागराज पहुंचने और उसे दफनाए जाने की खबर पुलिसवालों से ले रहे थे. जिस धूमनगंज थाने में अशरफ और अतीक को रखा गया था, वहां से कसारी-मसारी कब्रिस्तान की दूरी 5 किलोमीटर है. और रास्ता सिर्फ 15 मिनट का है.
यूं तो ये पूरी कहानी 10 घंटे की है, मगर अतीक और अशरफ के आखिरी 3 घंटों की कहानी अगर आप समझ लें, तो इस मामले की पूरी कहानी आपको खुद-ब-खुद समझ में आ जाएगी. शनिवार को अतीक और अशरफ को ठीक शाम के साढे सात बजे धूमनगंज थाने से पहली बार निकाला गया. लेकिन रात दस बजे तक भी जब ये दोनों कॉल्विन अस्पताल नहीं पहुंचे, तो अस्पताल के बाहर खड़े ज्यादातर मीडियाकर्मी वहां से चले गए थे. उनके जाने के ठीक आधे घंटे बाद अचानक पुलिस की गाड़ियों का काफिला अतीक और अशरफ को लेकर अस्पताल के गेट पर पहुंचता है. फिर जो होता है, उसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था.
14 अप्रैल 2013, शुक्रवार देर रात रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज, झांसी के मुर्दाघर से प्रयागराज के लिए दो अलग-अलग एंबुलेंस में असद और गुलाम की लाश रवाना होती हैं. झांसी से प्रयागराज पहुंचते-पहुंचते सुबह के नौ बज जाते हैं. दोनों लाशों को पुलिस की निगरानी में सीधे प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान ले जाया जाता है. और फिर वहीं दोनों को दफना दिया जाता है.
15 अप्रैल 2023, शनिवार प्रयागराज के धूमनगंज थाने में अतीक और उसके भाई अशरफ को पुलिस हिरासत में रखा गया था. इसी थाने में दोनों से पूछताछ चल रही थी. शुक्रवार की पूरी रात अतीक और अशरफ सोये नहीं थे. दोनों लगातार असद की लाश प्रयागराज पहुंचने और उसे दफनाए जाने की खबर पुलिसवालों से ले रहे थे. जिस धूमनगंज थाने में अशरफ और अतीक को रखा गया था, वहां से कसारी-मसारी कब्रिस्तान की दूरी 5 किलोमीटर है. सिर्फ 15 मिनट का रास्ता है. बेटे के दफनाए जाने की खबर के बाद शनिवार को पूरा दिन अतीक और अशरफ इसी थाने में रहे और इस दौरान दोनों से थोड़ी बहुत पूछताछ भी हुई.
15 अप्रैल 2023, शाम 7.30 बजे असद को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के बाद लगभग आठ घंटे बाद धूमनगंज पुलिस अतीक और अशरफ को लेकर पहली बार थाने से बाहर निकलती है. मीडिया का काफिला भी पीछे-पीछे था. करीब 17 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद अतीक और अशरफ को उमेश पाल मर्डर केस के सिलसिले में कुछ रिकवरी के लिए प्रयागराज का आखिरी थाना कहे जानेवाले पूरामुफ्ती थाने लाया जाता है. अतीक और अशरफ पूरामुफ्ती थाने में करीब आधा घंटा रुकते हैं. इसके बाद पुलिस की गाडियों का काफिला वापस धूमनगंज थाने पहुंचता है. दोनों को गाड़ी से उतारा जाता है और थाने के अंदर ले जाया जाता है.
अदालत ने दिया था मेडिकल जांच का आदेश और बस यहीं से कहानी शुरू होती है. दरअसल, लखनऊ और दिल्ली से पहुंचे ज्यादातर पत्रकार कॉल्विन अस्पताल के बाहर खड़े थे. इस उम्मीद में कि अतीक अहमद को यहां मेडिकल टेस्ट के लिए लाया जाएगा. असल में अदालत ने अतीक और अशरफ को पुलिस हिरासत में भेजने के साथ-साथ ये आदेश दिया था कि हर 24 घंटे में इन दोनों की मेडिकल जांच कराई जाए. 14 अप्रैल यानी शुक्रवार की रात को भी दोनों का इसी कॉल्विन अस्पताल में मेडिकल टेस्ट हुआ था.
अस्पताल से निकल गए थे ज्यादातर पत्रकार मगर 15 अप्रैल को हुआ यूं कि जब अतीक और अशरफ की गाडियों का काफिला पूरामुफ्ती थाने से सीधे धूमनगंज पहुंच गया, तब कॉल्विन अस्पताल के बाहर खड़े पत्रकारों को लगा कि आज उन दोनों का मेडिकल टेस्ट नहीं होगा और बस यही सोच कर कुछ लोकल पत्रकारों को छोड़ दें, तो दिल्ली और लखनऊ से आए सभी पत्रकार अस्पताल से निकल गए.

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