
दिवाली के 12 दिन बाद धुआं-धुआं आसमान, धोखा है पटाखे-पराली को दोष देना | Opinion
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दिवाली बीते हुए भी दो हफ्ते होने जा रहे हैं, लेकिन दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण के चलते जीना मुश्किल हो रहा है. लगता है, जैसे दम घुट रहा हो. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से हलफनामा दाखिल करने को कहा है, क्योंकि दिवाली की अगली सुबह पिछले दो साल में सबसे ज्यादा प्रदूषण लेवल दर्ज किया गया है.
दिवाली के ठीक एक दिन पहले, घर के पास वाले बाजार में मैंने एक दुकानदार से ग्रीन पटाखों के बारे में पूछा. अपनी दुकान के सामने सड़क पर उसने पटाखे, फुलझड़ियां, झालर और कैंडल की अस्थाई दुकान लगा रखी थी.
NCR के उस दुकानदार ने एक पैकेट उठाया और उस पर बने हरे रंग का डिजाइन दिखाते हुए बोला, यही ग्रीन पटाखा है. मतलब, ग्रीन पटाखे की परिभाषा अपनी जगह है, लेकिन ज्यादा महत्वपूर्ण पैकेट पर बने ग्रीन मार्क होते हैं - और वे मार्केट में धड़ल्ले से बिकते हैं.
दिवाली ही नहीं, उसके पहले और बाद की कई रातें भी ऐसे ही कथित पटाखों के शोर से गूंज रही थीं. और ये सब वैसे ही चल रहा है, जैसे देश में बाकी चीजें सुचारु रूप से चलती रहती हैं - देखना है कि दिल्ली पुलिस के कमिश्नर अपने हलफनामे में सरकार को क्या बताते हैं?
हैरान होने की जरूरत नहीं है. हाल ही में दिल्ली को दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर का तमगा हासिल हुआ है. दिवाली की अगली ही सुबह दिल्ली में प्रदूषण का स्तर पिछले दो साल की तुलना में सबसे ज्यादा दर्ज किया गया - और एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से हलफनामे के जरिये वस्तुस्थिति से अवगत कराने को कहा था.
दिवाली के आस-पास एनसीआर में एक सर्वे कराया गया है. सर्वे में सोशल मीडिया के जरिये दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के 21,000 लोगों की राय जानने की कोशिश हुई है. मालूम हुआ है कि प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे करीब 47 फीसदी लोगों ने एयर पॉल्यूशन से जुड़े उपकरण लिये हैं, या फिर दवाएं ली है. ये भी सर्वे में ही पता चला है कि दिल्ली-एनसीआर के 33 फीसदी लोग कफ सिरप ले रहे हैं, और बाकी लोग भी ऐसे ही पैरासिटामोल, इनहेलर या नेबुलाइजर और डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक्स ले रहे हैं - और हर दस में से चार परिवारों की यही कहानी है.
दिल्ली और एनसीआर में जैसे ही प्रदूषण का लेवल बढ़ता है, कभी पटाखे तो कभी पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली पर ठीकर फोड़ दिया जाता है. हालात बिगड़ने पर दिल्ली में सरकार एंटी स्मॉग गन या दूसरे उपायों पर विचार करना शुरू करती है, या फिर ऑड-ईवन स्कीम लागू कर दी जाती है - लेकिन अब तक ऐसी कोई उम्मीद नहीं बंधी है, जिससे ये समझा जा सके कि दिल्ली एनसीआर को प्रदूषण से स्थाई तौर पर निजात मिल सकती है.

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