
दिल्ली ब्लास्ट: 4 आतंकी डॉक्टरों के लाइसेंस कैंसिल, रजिस्टर से काटा गया नाम, अब नहीं कर पाएंगे प्रैक्टिस
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दिल्ली ब्लास्ट में शामिल चार आतंकी डॉक्टरों का मेडिकल करियर अब खत्म हो गया है. ये चारों अब कभी मेडिकल प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे और ना ही मरीजों का इलाज कर पाएंगे. नेशनल मेडिकल काउंसिल ने इनका चारों का रजिस्ट्रेशन खत्म कर दिया है और इनका नाम प्रैक्टिशर्नस लिस्ट से काट दिया है.
दिल्ली ब्लास्ट में शामिल चार आरोपी डॉक्टर अब डॉक्टरी की प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे. नेशनल मेडिकल कमीशन ने अपनी आधिकारिक रजिस्टर से इनका नाम काट दिया है. नेशनल मेडिकल कमीशन ने शुक्रवार को दिल्ली विस्फोट के बाद UAPA के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद डॉ. मुजफ्फर अहमद, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद का नाम नेशनल मेडिकल कमीशन से हटा दिया है.
इसके बाद आयोग के अगले आदेश तक ये डॉक्टर प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे और न ही मरीजों का इलाज कर पाएंगे. दिल्ली ब्लास्ट में शामिल ये आतंकी डॉक्टर कोर्ट से दोषी करार पाए जाने के बाद कभी सार्वजनिक जीवन में इस पेशे में वापस नहीं आ पाएंगे.
10 नवंबर को 2900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद होने और उसी दिन बाद में लाल किले के पास हुए शक्तिशाली कार विस्फोट की जांच में इन डॉक्टरों समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई लोगों को हिरासत में लिया गया है. इस धमाके में अबतक 13 लोगों की मौत हो चुकी है.
डॉक्टरी पेशे का द एंड
शुक्रवार को एक सार्वजनिक नोटिस में नेशनल मेडिकल कमीशन ने डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में लगाए गए आरोपों को सूचीबद्ध किया और कहा, "जम्मू और कश्मीर मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत डॉ. मुजफ्फर अहमद, डॉ. अदील अहमद राथर और डॉ. मुजम्मिल शकील को जांच एजेंसियों द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में शामिल पाया गया है."
कमीशन ने कहा कि इस तरह का जुड़ाव या आचरण प्रथम दृष्टया चिकित्सा पेशे के सदस्यों से अपेक्षित "नैतिकता, सत्यनिष्ठा और सार्वजनिक विश्वास के मानकों के अनुरूप नहीं" है. यह मामला इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (पेशेवर आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत आता है.

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